आज रात रुक जाओ ना


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Hindi sex story, kamukta मेरा नाम आकाश है मैं राजस्थान का रहने वाला हूं मैं राजस्थान के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखता हूं लेकिन मेरे पिताजी ने मुझे मेरे मामा जी के पास जयपुर पढ़ने के लिए भेज दिया था। जब मैं उनके पास पढ़ने के लिए गया तो वह मुझे पढ़ाई को लेकर बहुत डांटा करते थे क्योंकि मैं पढ़ने में बिल्कुल भी ठीक नहीं था परंतु धीरे-धीरे मैं अब सारी चीजों को समझने लगा था मैं अपनी पढ़ाई में पूरी तरीके से ध्यान देने लगा तो उन्होंने मेरा ट्यूशन भी एक अच्छे ट्यूशन टीचर से लगवा दिया जो कि मेरी बहुत मदद किया करते थे। अब मैं पढ़ने में काफी अच्छा हो चुका था जिस वजह से मैंने अपने स्कूल की पढ़ाई भी पूरी कर ली और अपने कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी कर ली मैं अच्छे नंबरों से पास हुआ और उसके कुछ समय बाद मेरी जयपुर में ही नौकरी लग गई। मेरे नौकरी सरकारी विभाग में लगी थी मैं अपने जीवन से बहुत ज्यादा खुश था मेरी जिंदगी में सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा था क्योंकि जो चीज मैंने सोची थी वह सब मुझे मिलती है जा रही थी।

उसी दौरान मेरी मुलाकात पारुल से हुई और जब मैं उसे मिला तो उसे मैं अपना दिल दे बैठा हम दोनों की मुलाकातो का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा था और हम दोनों जब एक दूसरे से मिलते तो हमें एक दूसरे से मिलना अच्छा लगता लेकिन मुझे क्या पता था पारुल मुझसे प्यार करती है यदि कोई लड़की मेरे साथ होती तो पारुल उसे हटाकर खुद मेरे साथ बैठ जाया करती थी वह मेरे लिए कुछ ज्यादा ही सीरियस थी। मैंने उसे कई बार समझाया इतना गुस्सा भी ठीक नहीं है लेकिन वह यह सब समझती ही नहीं थी यदि कोई भी मुझसे प्यार से बात करता या फिर किसी लड़की का मुझे मोबाइल पर मैसेज आ जाता तो उस वक्त तो मेरा उसके साथ झगड़ा होना तय था मैंने उसे कई बार समझाने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात बिलकुल भी ना मानी और हमेशा यही कहती की मैं तुमसे प्यार करती हूं और तुम मेरे सिवा किसी लड़की से बात नही करोगे। उसे जो भी अच्छा लगता हमेशा वह वही किया करती थी लेकिन मैं और पारुल शायद इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ा सकते थे, मैं पारुल के साथ अब यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ाना चाहता था और उसी दौरान मैं अपने गांव चला गया।

पारुल से मेरी बात हर रोज हुआ करती थी लेकिन वह मेरी मजबूरी को नहीं समझती थी यदि मैं उससे कहता कि अभी मैं अपने माता-पिता के साथ हूं तो भी वह मुझे कहती की तुम अभी मुझसे बात करो, इस बात को लेकर कई बार पारुल से मेरे झगड़े होते थे। मैंने उसे बहुत समझाया कि इतना भी प्यार एक दूसरे के लिए ठीक नहीं है यदि इसी प्रकार से हम दोनों के बीच चलता रहा तो मुझे लगता है कि हमें अलग होना पड़ेगा वह मुझसे हमेशा झगड़ा किया करती और कहती मैं तुमसे कभी भी अलग नहीं हो सकती। मैं सोचता था कि क्या मैं पारुल के साथ अपनी जिंदगी बिता लूंगा लेकिन मुझे पूरा यकीन हो चुका था कि मैं शायद उसके साथ अपनी जिंदगी नहीं बिता पाऊंगा मैं उससे शादी नहीं कर सकता था। जब मैं गांव गया था तो उसी बीच मेरे माता-पिता ने मुझे एक लड़की से मिलाया उसका नाम सुरभि है उन्होंने मुझे सुरभि से मिलवाया तो मैं उससे मिलकर बहुत प्रभावित हुआ उसकी बातें और उसकी समझदारी से मैं इतना ज्यादा खुश हुआ कि मैंने उससे सगाई कर ली और कुछ समय बाद ही हम दोनों की शादी होने वाली थी। मैंने यह बात अभी तो पारुल को नहीं बताई थी और ना ही मैं कभी भी पारुल को यह बात बताना चाहता था इसलिए मैंने यह बात उससे छुपा कर रखी मैं अपनी नौकरी आराम से कर रहा था और सब कुछ ठीक चल रहा था मैंने पारुल को इस बारे में नही बताया था परंतु पता नही पारुल को कहां से इन सब बातों की भनक लग गई। एक दिन उसने मेरे मोबाइल में सुरभि की तस्वीर देख ली वह पूछने लगी यह लड़की कौन है तो मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया मैंने उसे कहा यह मेरी दोस्त है उसने मुझसे पूछा लेकिन इसकी तस्वीर तुम्हारे मोबाइल में क्या कर रही है। मेरे पास उसकी बात का कोई जवाब नहीं था परंतु उस दिन तो मैंने जैसे-तैसे बात को घुमा दिया लेकिन आखिरकार मैं कब तक छुपा कर रखता एक ना एक दिन तो उसे पता चलना ही था की मैंने गांव जाकर चुपके से शादी भी कर ली लेकिन फिर भी मैंने पारुल को इसकी भनक भी नहीं होने दी।

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पारुल को भी अभी तक पता नहीं था मैंने उससे सब कुछ छुपा कर रखा था पारुल के साथ मेरे रिश्ते बिल्कुल नॉर्मल चल रहे थे मैंने उसे सुरभि के बारे में कुछ भी नहीं बताया था पर मुझे हमेशा ऐसा लगता कि कहीं मैं अपने इस रिश्ते की वजह से सुरभि को ना खो दूँ और यदि पारुल को इस बारे में पता चलेगा तो वह मुझे कभी माफ नहीं करने वाली थी। शायद मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया और मेरा ट्रांसफर जयपुर से अलवर हो गया जब मेरा ट्रांसफर जयपुर से अलवर हुआ तो मैंने पारुल से कहा अब तो मुझे अलवर जाना पड़ेगा वह मुझे कहने लगी कोई बात नहीं हम लोग फोन पर बात करते रहेंगे और एक दूसरे से मिलती भी रहेंगे परंतु मैं तो पारुल से दूर जाना चाहता था और उससे मैं कोई भी संबंध नहीं रखना चाहता था। यदि उसे मेरे और सुरभि के रिश्ते के बारे में पता चलता तो शायद वह मुझे कभी भी माफ नहीं करती मैं पारुल का दिल कभी दुखाना नहीं चाहता था क्योंकि वह दिल की बहुत अच्छी है लेकिन उसकी कुछ गलत आदतों की वजह से ही मैं उसे पसंद नहीं करता इसलिए अब मैंने उससे दूर जाना ही उचित समझा।

मैं कुछ दिनों के लिए अपने गांव गया और वहां से मैं अलवर चला आया जब मैं अपने गांव से अलवर आया तो मैंने वहां पर अपना सारा सामान शिफ्ट कर लिया मैं अब सुरभि को अपने साथ रखना चाहता था और वह भी मेरे साथ रहना चाहती थी क्योंकि शादी के बाद हम लोग एक दूसरे से काफी समय लग रहे थे इसलिए मैंने रहने की पूरी व्यवस्था कर ली थी और मैंने सारा सामान खरीद लिया था। पारुल से मेरी अभी भी फोन पर बात होती रहती थी और वह मेरे हाल-चाल पूछती रहती थी मैं भी उसे उसके बारे में पूछता था वह मुझे कहती कि तुम मुझसे मिलने कब आ रहे हो मैं उसे कहता बस कुछ दिनों बाद मैं तुमसे मिलने के लिए मैं आ रहा हूं। मैं सुरभि को अपने साथ ले आया था और मैंने एक एक दिन पारुल को फोन कर के अपनी शादी की बात बता दी वह बहुत ज्यादा दुखी हो गयी वह मुझे कहने लगी तुमने मुझे बहुत बड़ा धोखा दिया मैंने पारुल को सारी बात बता दी और कहा कि यदि मैं तुम्हें नहीं बताता तो तुम्हें और भी बुरा लगता लेकिन मुझे लगा मुझे तुम्हें बता देना चाहिए। मैंने उस वक्त पारुल को उसकी गलतियों का एहसास करवाया और उसे कहा हम लोग एक दूसरे के साथ तभी तक खुश थे जब तक हम दोनों के बीच में सब कुछ खुला था लेकिन अब यदि तुमसे कुछ भी बात मुझे कहनी होती है तो मुझे उसके लिए कई बार सोचना पड़ता है इसलिए मुझे लगा शायद तुम्हे यह सब बताना ही ठीक रहेगा। हम दोनों एक दूसरे के लिए कभी बने ही नहीं थे हम दोनों एक दूसरे से बहुत ज्यादा अलग हैं और मैंने अब शादी कर ली है मैं अपनी पत्नी के साथ खुश हूं पारुल मुझे कहने लगी तुमने मेरे साथ बहुत गलत किया। उसके बाद मैंने पारुल को कभी फोन नहीं किया और ना ही पारुल का मुझे कभी फोन आया मैं उससे अपने रिश्ते पूरी तरीके से खत्म कर चुका था। मुझे नहीं पता था कि कुछ महीनों बाद ही पारुल से मैं अलवर में मिलूंगा जब पारुल मुझे मिली तो मैं उसे अपनी नजरे ना मिला सका वह मेरे पास आई और कहने लगी तुमने मुझे बहुत बडा धोखा दिया और बहुत दुख पहुंचाया।

मैंने पारुल को समझाने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात को नहीं समझ रही थी मैंने उसे कहा तुम्हारे अंदर यही तो दिक्कत है इसीलिए तो मैंने तुम्हें छोड़ना ही बेहतर समझा। पारुल ने मुझे कहा तुम अपनी पत्नी के साथ खुश रहो और अपने जीवन में सिर्फ अपनी पत्नी को प्यार दो, मैंने पारुल को गले लगा लिया। जब मैंने उसे गले लगाया तो वह मुझे कहने लगी अब तुम्हें यह हक नहीं है कि तुम मुझे गले लगा सको लेकिन मैंने उसे काफी देर तक गले लगा कर रखा। वह शांत हो चुकी थी उसका गुस्सा भी ठंडा हो चुका था मैंने पारुल को समझाया और कहा तुम मेरे साथ चलो मैं पारुल को अपने घर पर ले आया। उस वक्त मेरी पत्नी गांव गई हुई थी पारुल को मैंने बिस्तर पर बैठाया और उसकी जांघों को मैं सहलाने लगा जब मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया तो उसने अपने शरीर को मुझे सौंप दिया। मैंने उसके होठों को भी बहुत देर तक चुमा वह मुझसे लिपटने लगी उसने अपने कपड़े उतार दिए वह मेरे सामने नंगी लेटी थी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उसके स्तनों पर रगड़ना शुरू किया मैंने उसकी गिली चूत पर अपने लंड को रगडना शुरू किया उसे बहुत अच्छा लग रहा था।

उसने मुझे कहा तुम अपने लंड को अंदर धक्का देते हुए घुसा दो मैंने भी तेज गति से धक्का दिया और अपने लंड को उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवा दिया। मेरा लंड उसकी योनि में जाते ही उसके मुंह से चीख निकल पड़ी वह मुझे कहने लगी क्या तुम मुझसे प्यार करते हो। मैंने परुल से कहा मैं तुमसे प्यार तो नहीं करता लेकिन तुम्हें देखकर मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया मुझे तुम्हारी चूत मारने की इच्छा जाग उठी। वह कहने लगी इसलिए तो तुमने मुझसे प्यार का नाटक किया था मैंने उसे कहा अभी तो तुम यह सब बात ना करो। उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड लिया मै बड़ी तेजी से उसे धक्के देने लगा, वह उत्तेजीत हो जाती जिससे कि उसका पूरा शरीर हिल जाता। मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो वह कहने लगी तुम्हारी इच्छा पूरी हो चुकी होगी क्या मैं चली जाऊं। मैंने उसे कहा क्या तुम मेरे पास नहीं रुक सकती वह कहने लगी तुम्हारे पास रुक कर क्या करूंगी लेकिन मैंने उसे अपने पास ही रुकवा लिया, उस रात हम दोनों ने जमकर सेक्स का मजा लिया।

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