अकेले में मिलो ना


Hindi sex stories, kamukta मैंने कुछ समय पहले नौकरी छोड़ दी थी और मैंने अपने घर के पास अपना ऑफिस ले लिया है मैंने अपना सप्लाई का काम शुरू किया है मेरा काम अच्छा चल रहा है लेकिन मुझे अब अपने लिए समय नहीं मिल पाता इसलिए मैं बहुत ज्यादा बिजी रहता हूं। एक दिन मैं घर पर था और मैं अपने ऑफिस के लिए निकला ही था तभी मेरे ऑफिस से लड़के ने फोन किया और कहा सर कुछ सामान चाहिए था कुछ लोग आए हुए हैं और वह सामान के लिए कह रहे थे मैंने उसे कहा मैं कुछ देर बाद आता हूं। मैं जैसे ही अपने ऑफिस पहुंचा तो मैंने अपने ऑफिस में काम करने वाले लड़के से कहा तुम इन्हें गोडाउन में लेकर चले जाओ और वहां से इन्हें जो सामान चाहिए वह दे देना वह कहने लगा ठीक है सर मैं अभी चले जाता हूं। वह वहां से चला गया मेरे पास 5 लड़के काम करते हैं कुछ तो गोडाउन का काम संभालते हैं जो ट्रक में सामान लोड करते हैं और कुछ ऑफिस में काम देखते है जो कि बिल बनाने का काम करते है।

मेरा काम भी काफी अच्छा चल रहा था मैं जब शाम के वक्त घर पहुंचा तो कृतिका घर पर आई हुई थी मैंने कृतिका से कहा अरे कृतिका तुम कब आई वह कहने लगी बस भैया मैं अभी आई हूं। कृतिका मेरे मामा की लड़की है और वह लखनऊ में रहती है उसे शायद कुछ काम था इसलिए वह दिल्ली आई हुई थी मैंने कृतिका से कहा तुमने अच्छा किया जो तुम हमसे मिलने आ गई। कृतिका का हमारे घर पर आना जाना लगा रहता है क्योंकि वह दिल्ली अपने काम के सिलसिले में आती रहती है उसने पिछले साल अपना कॉलेज पूरा किया है। कृतिका मुझसे पूछने लगी भैया आपका काम कैसा चल रहा है मैंने उसे कहा मेरा काम तो अच्छा चल रहा है तुम सुनाओ तुम क्या कर रही हो। वह कहने लगी मैं जिस कंपनी में जॉब करती हूं वह कंपनी मैं छोड़ने की सोच रही हूं क्योंकि मुझे बार-बार दिल्ली आना पड़ता है और अब दिल्ली आने में बहुत परेशानी होती है। मैंने कृतिका से कहा क्यों तुम्हें क्या यहां रुकने में कोई परेशानी होती है वह कहने लगी नहीं ऐसी बात नहीं है मुझे यहां रुकने में कोई परेशानी नहीं होती लेकिन अब कुछ समय बाद मैं शादी करने के बारे में सोच रही हूं मैंने उसे कहा यह तो तुम्हारे पापा सोचेंगे तुम शादी के बारे में सोच रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आया।

उसने मुझे कहा मैं अपने ऑफिस में एक लड़के से प्यार करती हूं मैंने यह बात अभी पापा को नहीं बताई बस मैं आपको ही बता रही हूं क्योंकि मुझे लगता है कि आप शायद मेरी मदद करेंगे। मैंने कृतिका से कहा तुम जिस लड़के से प्यार करती हो वह तुम्हारे ऑफिस में कब से काम कर रहा है कृतिका ने बताया वह हमारे ऑफिस में मैनेजर हैं और मुझे वह बहुत पसंद है उनका नाम सूरज है। मैंने कृतिका से कहा तुम कोई भी फैसला लोगी तो सोच समझ कर यह कदम बढ़ाना नहीं तो कहीं कोई दिक्कत ना हो जाए वह कहने लगी भैया मैं सूरज को काफी समय से जानती हूं वह बहुत अच्छे हैं। मैंने जब ऑफिस जॉइन किया था उस वक्त ही मेरी उनसे मुलाकात हुई थी लेकिन अब हम दोनों के बीच इतनी नजदीकियां बढ़ चुकी है तो हम दोनों ने अब शादी करने का फैसला कर लिया है। मैंने कृतिका से कहा तुम इस बारे में मामा से बात कर लो वह कहने लगी अभी कुछ समय बाद मैं पापा से बात कर लूंगी मैंने कीर्तिका से कहा तुम मामा जी से एक बार इस बारे में बात कर लेना वैसे भी वह काफी समझदार हैं वह तुम्हें मना नहीं करेंगे। मैं और कृतिका साथ में बैठे हुए थे तभी मेरी मम्मी आई और कहने लगी तुम दोनों आपस में क्यों खुसर पुसर कर रहे हो मैंने अपनी मम्मी से कहा कुछ भी तो नहीं बस ऐसे ही हम लोग एक दूसरे के बारे में पूछ रहे थे। कृतिका कुछ दिनों तक दिल्ली में रुकी और फिर वह चली गई मैं भी अपने काम में बिजी था कुछ महीनों बाद मुझे कृतिका का फोन आया तो वह कहने लगी भैया मैंने पापा से बात कर ली है और वह लोग रिश्ते के लिए मान चुके हैं। मैंने कृतिका को बधाई दी और कहा चलो यह तो बहुत खुशी की बात है कृतिका मुझे कहने लगी आपको अब शादी में आना है और जल्द ही हम लोग सगाई करने वाले हैं। मैं जब घर पर गया तो मैंने मम्मी से यह बात कही मम्मी कहने लगी हां मुझे तुम्हारे मामा ने सब कुछ बता दिया था और कुछ समय बाद वह लोग सगाई करने वाले हैं।

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मैंने मम्मी से कहा तो फिर अब हमें लखनऊ जाना पड़ेगा मम्मी कहने लगी हां बेटा लखनऊ तो जाना ही पड़ेगा। कुछ समय बाद सूरज और कृतिका ने सगाई कर ली कृतिका मुझे हमेशा ही बताया करती कि वह सूरज के साथ कितना अच्छा समय गुजारती है और वह लोग एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे। अब उनकी शादी का समय भी नजदीक आने वाला था जब उनकी शादी का समय नजदीक आने लगा तो कृतिका की शादी का कार्ड भी हमारे घर पर पहुंच चुका था और हम लोगों ने भी लखनऊ जाने की पूरी तैयारी कर ली थी। कुछ ही समय बाद हम लोग लखनऊ के लिए निकल पड़े जब हम लोग लखनऊ पहुंचे तो मामा कह कहने लगे बेटा तुम्हें ही सारा काम संभालना है मैंने मामा से कहा हां मामा क्यों नहीं। मै जब कृतिका से मिला तो मैंने कृतिका से कहा तुम तो बहुत खुश हो तुम्हारी शादी सूरज से जो हो रही है। वह कहने लगी हां भैया मैं तो बहुत खुश हूं कि मेरी शादी सूरज से हो रही है मुझे लगा नहीं था कि इतनी जल्दी सब कुछ हो जाएगा लेकिन पापा ने भी शादी के लिए हामी भर दी थी और सूरज के परिवार वाले भी मान गए थे इसलिए हम लोगों ने जल्दी ही सगाई कर ली।

मैंने कृतिका से कहा तो क्या तुमने अब जॉब छोड़ दी है तो वह कहने लगी हां भैया मैंने अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया हैं क्योंकि मैं नहीं चाहती अब मैं काम करूं शादी के बाद ही अब मैं इस बारे में सोचूंगी। मैंने कृतिका से कहा चलो यह तो अच्छी बात है तुम्हारी शादी अब सूरज से होने वाली है। हम लोग काफी थक चुके थे इसलिए मैंने सोचा कुछ देर आराम कर लेता हूं मैं बाहर हॉल में आराम करने लगा लेकिन वहां पर काफी शोर शराबा हो रहा था इसलिए मैं उठ गया और मैंने सोचा कुछ काम कर लिया जाए। मैंने मामा से पूछा मामा जी क्या कोई काम था तो मामा कहने लगे हां बेटा तुम एक काम करना मैं तुम्हें कुछ सामान की लिस्ट दे देता हूं तुम यह सामान ले आना। मैंने मामा से कहा ठीक है मामा जी आप मुझे सामान की लिस्ट भेज दीजिए मैं वह सामान ले आता हूं। मामा जी ने मुझे अपनी कार की चाबी दी और कहा तुम यह सारा सामान मार्केट से ले आना। मैं अब सामान लेने के लिए चला गया और जैसे ही मैंने सामान लेकर गाड़ी में रखवाया तो मामा जी का फोन आ गया वह कहने लगे बेटा कुछ गेस्ट आ रहे हैं तो क्या तुम उन्हें भी रेलवे स्टेशन से ले आओगे मैंने उन्हें कहा ठीक है मामा मैं उन्हें भी ले आऊंगा। मामा ने मुझे उनका नंबर दे दिया और कहा यह लोग दिल्ली से आ रहे हैं जब मामा ने मुझे उनका नंबर दिया तो मैंने उन्हें फोन किया वह कहने लगे कि हम लोग रेलवे स्टेशन पहुंच चुके हैं। मैंने उन्हें कहा बस कुछ देर बाद ही मैं आपको लेने के लिए आ जाऊंगा, रेलवे स्टेशन पर जब वह लोग मुझे दिखे तो उनके साथ उनका पूरा परिवार था फिर वह लोग मेरे साथ आ गए। मेरी नजर उस लड़की पर पडी जो कार के पीछे बैठी हुई थी उसका नाम रीमा था और वह लोग मामा जी के जानकार थे। मै रीमा को बार-बार शीशे से देख रहा था शायद उसने मेरी तरफ भी देखा और वह मुस्कुराने लगी।

उसे मैं पसंद आ गया था इस बात का पता मुझे उस वक्त चला जब हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे उसकी नजर मुझे ही देख रही थी मैंने उसे बहुत देर तक देखा। मैंने मौका देख कर रीमा को अकेले में बुलाया और हम दोनों छत पर चले गए मैंने रीमा को पकड़ा और उसके हाथों को मैं चूमने लगा। जब मैंने उसके गुलाबी होठों को चूमना शुरू किया तो वह मचलने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने उसके होंठों को बहुत देर तक चुमा। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए रीमा के हाथ में दिया वह थोड़ा शर्मा रही थी लेकिन उसने मेरे लंड को काफी देर तक अपने हाथों से हिलाया मैंने जैसे ही उसके मुंह के अंदर अपने लंड को डाला तो वह मचल उठी और कहने लगी मुझे तो मजा आ गया। वह अच्छे से उसे सकिंन करने लगी मैंने उसे कहा जल्दी से तुम अपनी सलवार को नीचे करो उसने अपनी सलवार को नीचे किया मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को घुसाते हुए धक्का मारना शुरू किया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया तो मैं उसे तेजी से धक्के देने लगा मेरे मामा जी का घर काफी बड़ा है इसलिए छत पर किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

मैं बड़ी तेजी से धक्के मारता जाता वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाती रहती जब उसकी चूतडे मेरे लंड से टकराती तो मेरे अंदर और भी जोश पैदा हो जाता। मैं उसको तेजी से धक्के दिए जा रहा था रीमा को बहुत मजा आ रहा था उसकी योनि से खून निकलने लगा था मैं उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था। मैं ज्यादा देर तक उसकी योनि की गर्मी को बर्दाश्त ना कर सका और मेरा वीर्य पतन हो गया हम दोनों ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और वहां से नीचे चले आए। जैसे ही हम लोग नीचे आए तो मेरे मामा ने हमें देख लिया था लेकिन उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा उन्हें मुझ पर पूरा शक तो हो चुका था कि रीमा और मेरे बीच में कुछ चल रहा है। मेरा परिवार कृतिका की शादी होने के बाद वापस लौट आए कृतिका से अब भी मेरी बात होती है हम दोनों एक दूसरे से अश्लील बातें करते रहते है।

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