आखिर चुदाई है क्या बला?


hindi sex story, antarvasna हेल्लो दोस्तों, क्या चल रहा है आपके आस पास | मुझे कई लोग कहते है तुम सुन्दर हो | तुमने अपनी जवानी में कितने गुल खिलाये है | यहाँ पर गुल खिलाने का मतलब कितनी लडकियां पटाई  से है | वैसे मुझे लडकियां  पटाने का शौक नही है | मेरी कहानी उन दिनों की है | जब मैं  जवान था | जवान लोग को शर्म आती है अगर उन्होने आज तक एक लड़की नहीं पटाई | लड़की पटाना सरल है | लेकिन बहुत सारे जवान लोग हमेशा उनके कीमती वकत में लड़कियों  को अवोइड करते है | मैं  भी आप लोगो की तरह साधारण लोगो के जैसा था | लेकिन मुझे लड़के और बुजुर्ग लोग छेड़ते थे और कहते थे सुन्दर तो हो लेकिन एक भी गर्लफ्रेंड नहीं है | दोस्तो चलिए अब मैं  आपको अपने बारे में कुछ बताऊ | यह एक सच्ची कहानी है | एक लड़का जो कि सुन्दर था पर कुछ ख़ास नहीं था | कपडे भी पहनने का ढंग नहीं था | लेकिन एक लड़की से परिचय होने के बाद सब कुछ बदल गया | वह लड़की कुछ ख़ास सुन्दर नहीं थी लेकिन उसकी अदाओं से ऐसे लगता था जैसे उससे सुन्दर कोई नहीं है | इसी चीज़ के कारण मैं  उसे ख़ास मानने लगा | आगे जो कहानी आने वाली है उसे पढकर आपको काफी शानदार लगेगा | मैं  उसे इतना ख़ास मानता था जैसे वो ही इस दुनिया कि सबसे सुन्दर लड़की है | वह अक्सर मेरे घर के पास से गुजरती थी | वह मेरे परिचित वाली लड़की थी इसलिए मैं  उसकी अजीब वाली हरकतों के लिए टोका करता था | वह इतना ओवेराक्टिंग करती थी जैसे कोई आसमान का चांद हो | लेकिन एक दिन उसने मुझे बदलाव का महत्व बताया |

इसके अलावा बदलाव का महत्व बताने के बाद उसने मुझसे से जो कहा उसे सुनकर मेरे पैरों से जमीन निकल गयी | उसने मुझ से कहा तुम भले सुन्दर हो और मैं  सुन्दर नहीं हूँ लेकिन क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है ? मुझे तुम हमेश छेड़ते और कहते हो कि तुम सुन्दर नहीं | दोस्तों यह वह लड़की है जो अक्सर लोगो को बदलने में भरोसा करती थी | मैं  उसके एक बदलाव वाले सुझाव के कारण बदल गया | मैंने नये और साफ़ कपडे पहनना शुरु कर दिया | मैं अक्सर उसी लड़की से पूछता था कि मैं लड़कियों से कैसे दोस्ती करूँ | वह भी मुझे लड़कियों से दोस्ती करना सिखाने के लिए तैयार हो गयी | मैं रोज नहा धोकर और नये कपडे पहन कर तैयार रहता था | उसका इंतज़ार करता था ताकि वह आये और मुझे कुछ सिखाये | उसने भी मुझे महत्व दिया और कुछ नया सिखाना शुरु कर दिया | वो और मैं मेरे घर के छत पर कुछ ख़ास सीखते थे | वह मुझे सिखाती थी कि पहले लड़कियों का भरोसा जीतो | लड़कियों का भरोसा जीतने के लिए तुम्हे एक सभ्य लडके की तरह उन से बर्ताव करना पड़ेगा | जो सभयता से बर्ताव नहीं करता उन्हे कोई पसंद नहीं करता है | मैंने भी हामी भरते हुए सभ्य होने का उससे वादा किया | दूसरा ख़ास सुजाव उसने मुझे कि दिया लड़कियों से तुम पहचान बनाओ |

बिना पहचान बनाकर तुम कोई लड़की से दोस्ती नहीं कर सकते हो | मुझे वो बदलाव का रास्ता सिखा रही थी | मैं  हमेशा मेरे एक दोस्त से उस लड़की के बारे में चर्चा करता था | मेरा दोस्त की बहुत गर्लफ्रेंड है लेकिन वे सिर्फ उसकी दोस्त है | बहुत सारी गर्लफ्रेंड मतलब सच में बहुत सारी थी लेकिन उसमे से उसने एक को भी नहीं चोदा था | मेरे दोस्त ने मुझे सुझाव दिया कि तुझे भी एक गर्लफ्रेंड बनाना पड़ेगी | मैं भी बदल गया था उस लड़की की वजह से और सड़क के किनारे नयी लड़कियों को परखने लगा | मैंने सोचा देखू तो जो मैंने सीखा है वह कारगर है या नही | वास्तव में मेरी सीख ने मुझे बहुत फायदा दिया | मुझसे करीब दस लड़कियों ने दोस्ती कर ली | मैं  और कुछ सिखने के लिए अपनी परिचय वाली लड़की से गुजारिश करने लगा | उसने और सिखाना शुरु किया | मैं  उसे छत पर बुलाता था और सिखाने का सारा कारोबार छत पर चलता था | पर एक दिन एक घटना हुई और मैं  धोखे से उसके ऊपर गिर गया और बहुत देर तक मैं उसके ऊपर गिरा पड़ा था | कुछ देर बाद उस के ऊपर गिरा रहने के बाद मैंने उसके गाल को चूमा | फिर मैंने उसके दूध को दबाया | इतना कुछ चल रहा था तभी उस लड़की का छोटा भाई मेरे घर आया और उसको बुलाने के लिए छत की सीढ़ी पर चढ़ने लगा | वह पल अगर हम अकेले तो वह ना केवल मेरे घर आ पाती इसके आलावा मेरे घर वाले भी मुझे डाटते भी नही | हमने उसके छोटे भाई के आने से पहेले ही एक दुसरे के ऊपर से उठ गए | वह उसके घर लौट गयी लेकिन कुछ देर बाद फिर लौट आई | हम दोनों हसने लगे क्योकि वह घटना ही कुछ ऐसी थी | मैंने उसे कुछ खाने को दिया और उसने मुझे धन्यावाद दिया |

हमने फिर से एक दुसरे से बात शुरु की | हम एक दुसरे से गिरने वाली घटना पर बात करने लगे | फिर कल मिलने का वादा किया और वह आ गयी | मैंने उसे छत पर चलने का आग्रह किया | उसने भी मुझे कुछ देर बाद छत पर चलने का आश्वासन दिया और हम नीचे बैठे रहे | कुछ देर बाद वो अन्दर आई और घर पर सब लोग होने के कारण मैंने कुछ देर तक उससे बात की और उसके बाद मैंने उसे घर लौटने को कहा | अगले दिन वो फिर घर आई और हम दोनों कुछ सीखने के बहाने ऊपर छत चले गए | सीखते हुए हम हसने लगे और हाथ भी मिलाया | हस्ते हुए मैं उसका हाथ मरोड़ने लगा | धोके से मैंने उसे गले लगा लिया और उसे कसकर गले लगाया | लेकिन उसे छोड़ दिया और वह हसने लगी | मैंने कुछ देर बाद उसे फिर किसी घटना को सुनाया और हसाने लगा और उसे गले से लगा लिया | गले लगाने के बाद मैंने उसके गाल को चूमा और दूध दबाने लगा | उसने भी मुझे गले लगाया और इसके बाद हम एक दुसरे के होंठो को चूमने लगे | पर मुझे याद आया कि अभी तक मैंने उसका नम्बर नहीं लिया था | मैंने उसे अपना नम्बर दिया और बाद में उसने मुझे उसका नम्बर दिया | मैंने उसे मिलने के लिए एक स्थान तय किया उसके बाद एक गाडी में बैठकर हम सुनसान स्थान पर गए | मैंने उसे चूमा उसके गाल पर और बाद में उसके दूध को दबाया | मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए और उसके भी कपडे उतार दिए | उसे चोदने के बाद मैंने कपडे पहना और हमने कुछ खाने का योजना बनाया | मैंने एक पास के आलूबंडा वाले से कुछ आलूबंडा पैक करवाया और उस लड़की को खाने के लिए दिया | आलूबंडा खाने के बाद मैंने उसे नये सुनसान वाला स्थान में ले गया | पर उस दिन चुदाई ढंग से हो नही पायी मेरी क्यूंकि किसी के आ जाने का दर सता रहा था |

एक दिन मुझे अच्छा मौका मिल ही गया और मैंने उसे अपने घर बुला लिया | मैंने केवल उसका पजामा उतारा ताकि कोई आये तो वह पजामा तुरन्त पहन सके | मैंने पहेले तो अपनी चड्डी उतारी और लंड उसकी चूत में घुसेड दिया | थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत को चूमा और फिर चुदाई चालु कर दी | मैंने चुदाई के साथ अपने हाथो से उसका चूत को रगडा | रगड़ने के बाद उसकी चूत से पानी निकला जिस को मैं चुदाई रोक के चाटने लगा | मेरे लंड ने बहुत बड़ा काम किया क्योकि लम्बा होने की वजह से उसको बड़ा दर्द हो रहा था | पल भर की चुदाई करना मेरे लिए गवारा नहीं था | इसलिए मैं ने देर तक उसे चोदा और अपने घर में चोदा | सबसे बड़ी बात अगर आप किसी को चोदो तो कंडोम अपने लंड को अवस्य पहनाओ क्योकि यह एड्स से बचाता है | मैंने बिना कंडोम के उसे आज तक नही चोदा उस दिन भी कन्डोम लगाया था | मेरी सच पर आधारित इस कहानी से आप परिचित हो चुके हो | आज मैं ने अपनी कहानी सुनाई है कल आप दूसरो के सामने आपकी कहानी सुनाना | लेकिन चोदने की एक कला होती है | मैंने उसे उठाकर चोदा है | इस तरह की चुदाई में दम लगता है | चोदने कि यह कला मेरे दोस्त ने मुझे बताई थी | मैंने उसे विभिन अवस्थाओ में उसे चोदा है | घोड़े की तरह उस करके भी चोदा था | आपको चुदाई करना है तो यह दो अवस्थाए काफी दमदार होती है | चुदाई करने वालो को दमदार होना पडता है | रोज चिकन खाओ क्योकि चिकन दम प्रदान करती है | दमदार लोग चिकन खाते है | पहलवान भी चिकन को प्रथमिकता देते है | चुदाई करना हो और दमदार चुदाई करना हो खासकर उठाकर तो चिकन खाओ | मैं  पहले दुबला पतला था लेकिन चिकन ने कमाल कर दिया |

कुछ महीनो के बाद उसने मुझे पहलवान कि तरह मोटा कर दिया | चुदाई के लिए आपको पहलवान की तरह होना अवश्यक है क्योकि पहलवान ही देर तक चोद पाते है | यह कहानी आपके लिए एक प्रेरणा है क्योकि एक भी गर्लफ्रेंड नहीं होना आपके लिए शर्मनाक है | उस लड़की को मैं ने एक बार अपने मामा के आफिस ले कर गया था | वो लड़की वहा पर उसके घरवालो से ये बहाने से आई थी कि उसे जॉब करना है | जब मुझे रूपए की आवस्यकता होने लगी थी तब मैं ने अपने मामा के आफिस में कार्य किया | मैंने अपनी सहेली को राय दिया तुम भी मेरे मामा के ओफिस आया करो और रूपए कमाया करो | वो लड़की रोजाना आफिस आने लगी | मैं ने अब अपने मामा को फुसलाया और कहा आप को बाहर जाना पडता है कृपया आप मुझे आफिस की देख रेख का कार्य सौप दो | मेरे मामा को मेरे प्रस्ताव पसन्द आया और उन्होंने मुझे आफिस की देख रेख का कार्य मुझे दे दिया | अब जब मामा आफिस के कार्य से बाहर चले जाते थे तो मैं  उस लड़की को अफिस के एकान्त वाले कमरे में ले जाता था और आफिस में चुदाई करता था | चुदाई करने के लिए मुझे लम्बा वक्त मिल जाता था क्योकि उस वक्त आफिस में कोई नहीं रहता था जो सारे आफिस में घूम सकता था | मेरे आलावा किसी के पास अनुमति नहीं थी की कोई आफिस के हर कमरे में घुस सकता था | इसलिए मैं  मेरे औदे का भुरपुर फायदा उठाता था | मेरे मामा भी लगभग एक महीने के लिए बाहर चले जाते थे | इसलिए आफिस की देख रेख करना उसकी सफाई करवाना मेरे लिए सरल कार्य था | आफिस में अन्य लोग भी कार्य के लिए आते थे लेकिन मुझे कोई दिक्कत नहीं होता था | मैं  सिर्फ अपने मामा से डरता था क्योकि वो ही सिर्फ उस आफिस के मालिक थे | वो आफिस के सबसे बड़े थे और उनके बाद में आफिस के बड़े औदे में थे | भेले मेरी थानखा अन्य लोगो से कम थी लेकिन पूरी देख रेख मेरे ऊपर थी |