और तेज धक्के मारो


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hindi sex story, kamukta मैं स्कूल में अध्यापिका हूं मेरी शादी को छै वर्ष हो चुके हैं और मेरी शादी कानपुर में हुई है मेरे पति भी अध्यापक हैं उनका नाम मोहन है। हम दोनों कानपुर में ही रहते हैं लेकिन मुझे कई बार लगता है कि हम दोनों शायद एक दूसरे को कभी समय देख नहीं पाते और एक दूसरे से कभी अच्छे से बात भी नहीं हो पाती, मैंने एक दिन अपने पति मोहन से कहा स्कूल में गर्मियों की छुट्टी पड़ने वाली है तो क्या हम लोग इस बीच कहीं घूमने का प्लान बना सकते हैं मोहन कहने लगे कि पिछले साल ही तो हम लोग घूम आए थे मैंने मोहन से कहा तुम भी कितने ज्यादा बोरिंग हो पिछले एक साल से हम लोग कहीं घूमने भी नहीं जा पाए हैं मोहन मुझे कहने लगे संगीता तुम्हें पता है मुझे घूमने का शौक नहीं है मैं घर पर रहना ही पसंद करता हूं मैंने मोहन से कहा तुम्हें घूमने का शौक नहीं है लेकिन तुम्हारी वजह से मुझे भी अपने शौक का गला घोटना पड़ता है इसलिए तुमसे बात करना ही बेकार है।

मैं मोहन से गुस्सा होकर दूसरे रूम में चली गई और मोहन से मैंने बात भी नहीं की, मोहन दिल के बिल्कुल भी बुरे नहीं है वह मेरे पास आये और कहने लगे देखो संगीता तुम्हें पता है मैं घर पर रहना ही ज्यादा सही समझता हूं मैं कहीं भी जाना पसंद नहीं करता। मैंने मोहन से कुछ देर तक तो बात नहीं की जब मैंने मोहन से कहा कि यदि तुम मेरे साथ कहीं घूमने चलोगे तो इसमें क्या कोई आफत आ जाएगी मोहन कहने लगे आफ़त तो नहीं आएगी, मैंने मोहन से कहा देखो मैं कुछ भी नहीं सुनना चाहती मैंने घूमने का पूरा प्लान बना लिया है यदि आप मेरे साथ चल रहे हो तो ठीक है नहीं तो मैं कल ही चली जाऊंगी, मोहन कहने लगे तुम भला अकेले कहां जाओगी अब तुमने पूरा प्लान बना ही लिया है तो मैं भी तुम्हारे साथ चल ही लेता हूं। मोहन बड़े ही बोरिंग किस्म के व्यक्ति हैं मेरे माता-पिता ने मेरी शादी जब मोहन से की थी तो उस वक्त वह ठीक थे लेकिन समय के साथ-साथ उन का भी नेचर बिल्कुल ही पूरी तरीके से बदल चुका है और वह कहीं भी घूमने का शौक नहीं रखते लेकिन मैंने तो घूमने का पूरा प्लान बना ही लिया था और मैं कुछ दिनों के लिए अपनी बुआ के पास अहमदाबाद जाना चाहती थी उसके बाद वहां से मुंबई में मैं कुछ दिन बिताना चाहती थी मैंने ट्रेन की टिकट भी करवा ली और मोहन और मैं जाने की तैयारी करने लगे।

मैं और मोहन एक दूसरे के साथ कभी भी झगड़ा नहीं करते लेकिन वह बहुत ज्यादा बोरिंग है इस वजह से मुझे कई बार ऐसा लगता है कि मोहन बहुत ही ज्यादा बोरिंग किस्म के व्यक्ति हैं मैं और मोहन अब साथ में जाने के लिए तैयार हो चुके थे कुछ ही समय बाद हमारे स्कूल की छुट्टियां पडने वाली थी और जब हम लोगों की छुट्टियां पड़ी तो उसके कुछ दिनों बाद हम लोग अहमदाबाद के लिए निकल पड़े, जिस वक्त हम लोग अहमदाबाद जा रहे थे तो मेरा सामान घर पर ही रह गया था मोहन को भी उस वक्त ख्याल नही आया और ना ही मोहन मुझे रहा, उसमें मेरे काफी कपड़े रह गए थे मोहन मुझे कहने लगे कोई बात नहीं हम लोग अहमदाबाद में ही कपड़े खरीद लेंगे। मैं और मोहन अब साथ में ट्रेन में बैठे हुए थे तभी हमारे सामने एक परिवार आकर बैठ गया उनके साथ में एक छोटी सी बच्ची भी थी उसकी उम्र 2 या 3 साल की रही होगी वह बच्ची बड़ी ही प्यारी थी उस बच्ची को देखकर मैंने उसकी तरफ जैसे ही अपने हाथ को हिलाया तो उसने भी मुझे देख कर एक प्यारी सी मुस्कुराहट दी और उसकी मां मुझे कहने लगी कि मेरी बच्ची हर किसी को देख कर मुस्कुरा देती है। अब उस महिला से मेरी बात होने लगी जब मैंने उन्हें बताया कि हम दोनों ही स्कूल में टीचर है तो वह कहने लगी यह तो बहुत अच्छी बात है वह मुझसे पूछने लगी आप लोग कहां जा रहे हैं तो मैंने उन्हें बताया कि हम लोग अहमदाबाद जा रहे हैं वहां पर मेरी बुआ रहती है और कुछ दिन हम लोग वहां पर ही रुकने वाले हैं, उस महिला ने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम कावेरी था। मैंने उनसे पूछा आप लोगों की शादी कब हुई तो वह कहने लगे हम लोगों की शादी को हुए 5 वर्ष हो चुके हैं उनके पति ज्यादा बात नहीं कर रहे थे लेकिन अब हम लोगों को साथ में ही सफर करना था तो इसलिए वह भी अब बात करने लगे।

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कावेरी के पति का नाम राकेश है राकेश और मोहन साथ में बात करने लगे और हम लोगों की भी अच्छी बातचीत होने लगी, कभी कभी वह मुझे अपनी बच्ची को पकड़ा देते। मोहन और मेरी शादी को इतने वर्ष हो चुके हैं लेकिन हम लोगों ने अभी तक बच्चों की प्लानिंग नहीं की पर उस बच्ची को देखकर मुझे लगा कि हम लोगों को भी अब बच्चे के बारे में सोचना चाहिए। मैंने कावेरी से पूछा आप लोग क्या अहमदाबाद में ही रहते हैं? वह कहने लगी नहीं हम लोग अहमदाबाद में नहीं रहते हम लोग मुंबई में रहते हैं लेकिन का कुछ काम है अहमदाबाद में इसलिए हमें भी कुछ दिनों के लिए अहमदाबाद में रुकना पड़ेगा और उसके बाद हम लोग वहां से मुंबई चले जाएंगे, राकेश का अपना ही कोई बिजनेस था इसलिए वह अहमदाबाद ही रुकने वाले थे और उसके बाद वहां से मुंबई उन्हें भी जाना था। मैंने उनसे पूछा आप लोग मुंबई कब जाएंगे तो वह कहने लगे कि हम लोग मुंबई कुछ दिनों बाद ही निकल जाएंगे, अहमदाबाद में हम लोग शायद 2 से 3 दिन ही रुक पाएंगे, मैंने कावेरी से कहा ठीक है हम लोग मुंबई में घूमने आने वाले हैं यदि आपको कोई परेशानी ना हो तो क्या आप हमें अपने साथ घुमा सकते हैं, राकेश मुझे कहने लगे क्यों नहीं जब आप मुंबई आए तो मुझे फोन कर दीजिएगा।

राकेश ने मुझे अपना नंबर दे दिया राकेश भी दिल के बहुत अच्छे थे और कावेरी भी बहुत अच्छी थी, कावेरी ने भी मुझे अपना फोन नंबर दे दिया वह मुझे कहने लगी आप जब भी मुंबई आएंगे तो आप हमें फोन कर दीजिएगा। हम लोग भी अहमदाबाद पहुंच चुके थे और अहमदाबाद से मैं अपने बुआ जी के घर चली गई मोहन तो मेरी बुआ जी के यहां पर भी एक कोने में बैठे रहते और अपने फोन पर ही लगे रहते वह ज्यादा किसी के साथ भी बात नहीं करते। मैंने उन्हें कहा भी कि तुम इतना चुप चुप क्यों बैठे हो तो वह कहने लगे कि तुम बात कर तो रही हो कोई जरूरी नहीं कि मैं भी बात करूं। मुझे लगा कि शायद मोहन को मेरे साथ आना ही अच्छा नहीं लगा लेकिन मैं अपने बुआ से इतने समय बाद मिलकर बहुत खुश थी और हम लोग साथ में घूमने भी गए उनके बच्चे बड़े ही हंसमुख किस्म के हैं और उनके साथ मुझे बहुत अच्छा लगता है। हम लोग मेरी बुआ के घर पर 5 दिन रूके और उसके बाद हम लोगो ने मुंबई जाने की सोची मैंने मोहन से कहा हम लोग अब मुंबई चलते हैं वह कहने लगे हां क्यों नहीं हम लोग वहां से मुंबई चले आए हम लोग मुंबई में होटल में रुके हुए थे मैं काफी वर्षों पहले अपने माता पिता के साथ मुंबई में आई थी लेकिन इतने वर्षों बाद सब कुछ बदल चुका था हम लोग जिस होटल में रुके थे वहां पर से मुंबई का रात का नजारा बड़ा ही अच्छा दिख रहा था क्योंकि वह होटल काफी बड़ा था और वहां से आस पास का नजारा बड़ा ही अच्छा लग रहा था मैं यह सब देखकर बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने मोहन से कहा क्या हम लोग घूमने चले वह कहने लगे नहीं मेरा मन नहीं हो रहा तुम हो आओ, मेरी तबीयत भी कुछ ठीक नहीं लग रही। मेरी भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं अकेले कहां जाऊं मैंने उस वक्त राकेश को फोन किया। राकेश मुझे कहने लगे संगीता जी मैं आपसे अभी मिलता हूं वह कुछ देर बाद ही मुझे मिलने के लिए आ गए।

उन्होंने मुझे अपनी कार से रिसीव किया मै उनके साथ उनकी कार में ही थी वह मुझे कहने लगे मोहन जी नहीं आए। मैंने उन्हें कहा अरे उनका तो बिल्कुल भी मन नहीं होता वह होटल मे है। मैं और राकेश के साथ थी, मैं उनसे कहने लगी आपकी बच्ची बहुत प्यारी है। आपकी बच्ची जैसे ही मुझे भी बच्चा चाहिए वह मेरी तरफ देखकर कहने लगे वह तो सिर्फ मैं ही आपको देख सकता हूं। मेरे राकेश को देखकर लार टपकने लगी मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। वह भी समझ गए हम दोनों को कहां जाना चाहिए वह मुझे लेकर अपने दोस्त के घर चले गए। हम दोनों फ्लैट में थे, जब उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए तो मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा उन्होंने मेरे स्तनों को बहुत देर तक चाटा, मेरे स्तनों से खून भी निकाल दिया।

राकेश ने मेरे स्तनो से खून निकाल दिया मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। जब उन्होंने मेरी गांड को अपने हाथ से दबाना शुरू किया तो मैं मचलने लगी मैं पूरी तरीके से मचलने लगी तो उन्होंने अपने लंड को मेरी योनि पर सटा दिया और धक्का देते हुए अपने लंड को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। उनका लंड मेरे योनि में जाते ही मुझे एक अलग सा करंट महसूस हुआ वह मेरे दोनों पैरों को अपने कंधो पर रखकर मुझे चोदने लगे। उन्होंने मुझे इतनी देर तक झटके मारे मुझे मजा आने लगा उनके झटको में इतनी तेज होती कि मेरा पूरा शरीर हिल जाता मेरी चूत के बुरा हाल हो जाते। जब उन्होंने अपने वीर्य को मेरी योनि में गिरा दिया तो वह मुझे कहने लगे अब आपको मेरे बच्चे जैसी बच्चा जरूर मिल जाएगा। मैंने उन्हें कहा धन्यवाद राकेश जी आपने तो मरी  इच्छा पूरी कर दी। वह मुझे कहने लगे लेकिन आपकी चूत बडी ही टाइट है क्या मैं आपकी चूत एक बार और मार सकता हूं। मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं उन्होंने मुझे एक बार और चोदा, उन्होंने अपनी संतुष्टि बड़े अच्छे से कि। मैं भी उनसे बहुत खुश थी जब वह मुझे धक्का मारते तो मैं उन्हें कहती मुझे और भी तेजी धक्के मारो। इतने समय से मैं भूखी बैठी थी उन्होंने मुझे बड़ी तेजी से चोदा मेरी चूत का उन्होंने बुरा हाल कर दिया, मैं बहुत ज्यादा खुश थी।

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