चूत चुदाई वाला कारखाना


antarvasna, kamukta हाय दोस्तो, चलो आज मै आपके लिए एक प्लास्टिक वाला कारखाना का किस्सा सुनाने वाला हूँ | ये कहानी सच पर अदारित है | इस कहानी को आपके सामने इसलिए ले कर आया हूँ क्योकि ये कहानी आपको उस सचचाई से अवगत करवाने वाली है जिसे जानकर आप खुस तो होने वाले है लेकिन चाकित भी रह जाओगे | मुझे जीवन में कुछ बेहतर करने की तलास में रहता हूँ | इसलिए बेहतर करने के उदेश्य से मैंने गाव को अलविदा कर दिया और दादा के शहर पर रहने के लिए आ गया था | जब मेरी नौकरी लग चुकी थी तब मुझे एक मित्र मिला और मैंने उसकी बहन को पटाने के लिए उस लड़की के लिए उसके शहर पुणे गया हुआ था | उसकी बहन को पटाने के लिए मैंने कई पापड़ बेला और आखिरकर मैंने उसकी बहन को पट्टा लिया |

चलिए जानते है की मैंने उस लड़की को कैसे पटाया था | मेरे दादा एक सरकारी नौकरी किया करते थे लेकिन अब वो बुडे हो चुके थे | मेरे दादा ने एक दिन मुझे फोन लगाया और मुझ से कहा तुम क्या करते हो | तब उन्होने मुझे बताया की अगर तुम्हे नौकरी की आवस्यकता है तो तुम मेरे शहर पर आ सकते हो | मैंने दादा को फोन पर हा कर दिया | जब मैंने दादा को नौकरी के लिए वादा कर दिया तो मुझे गाव को अलविदा करना पड़ा | जब मै शहर आगया था तब मै शहर के रहन सहन से बिलकुल अनजान था | एक अनजान बन्दा होने के कारण मै शहर के विषय में कुछ ख़ास नही जनता था | शहर में जब मै बोर हो जाता था तब मै शहर की लडकिया को देखा करता था | शहर की लडकिया सुन्दर होती है | उस समय पर जब मै शहर आया था तब मुझे एक लड़की दिखी और मै उसका पीछा पैदल करने लगे | शहर की गलियो के विषय में कुछ नही मालूम था | मै दादा के शहर पर एक बार गलियो के अन्दर पैदल चल रहा था और मै दादा का घर खोज नही पा रहा था | दादा का घर खोजते हुए मुझे काफी समय हो गया था इसलिए मैंने एक राहगीर से पूछा की मेरे दादा का नाम ले कर की क्या आप मेरे दादा को पहचानते है | अफसोस वो बन्दा मुझे कुछ भी बताना में असमर्थ रहा | तब मैंने अन्य राहगीरो से पूछा और कुछ देर तक पसीना बहाने के बाद मुझे एक आसा की किरण दिखाई देने लगी | एक राहगीर मेरे दादा को पहचानता था उसने मेरे दादा के घर मुझको पहुचा दिया और मुझ से कहने लगा तुम लडकियो का पीछा नही किया करो | क्योकि उसने मुझे देखा था जब मै एक लड़की के पीछा जा रहा था |

उस राहगीर का अहसान चुकाने के लिए मैंने उस राहगीर का फोन नम्बर ले लिया | वो राहगीर मेरा मित्र बन गया था | उस मित्र ने उस दिन मेरी सहायता करके एक बड़ा एहसान किया था | मेरे दादा ने उस दिन से मुझे एक बन्दे को साथ ले जाने के लिए कहा था क्योकि मै शहर की गलियो के प्रति बिलकुल अनजान था | एक सप्ताह तक मुझे उस बन्दे ने शहर की सारी गलियो से परिचित करवा दिया था | मै रोजाना एक सप्ताह तक उस लड़के के साथ घुमा करता था | जब मुझे सारी गलिया मालूम चल गयी तो मै अकेले शहर में घुमने लगा और लडकियो का अकेले पीछा किया करता था | मै भले अपने छोटे भाई को लडकियो से दूर रहने की सलाह देता था  लेकिन मै शहर में आकर लडकियो का पीछा करने लगा | जब मै शहर पर दादा के यहा रहा करता था तो मेरे दादा के पड़ोस में एक लड़का रहा करता था | उस पड़ोस के लड़के के यहा मेरा आना जाना तब शुरु हुआ जब वो मेरे दादा के घर पर किसी प्रकार की उनके घर पर बनी हुई सब्जी देने के लिए आया था | वो लड़का मेरे दादा का खास हुआ करता था इसलिए मेरे दादा के लिए कुछ न कुछ उसके घर का बना हुआ अवस्य लाता था | मेरे दादा भी उसके घर की बनी हुई सब्जी और भोजन के सौकीन थे | मेरे दादा ने एक दिन मुझे उस लड़के के घर भेजा क्योकि दादा के घर पर मेरी दादी ने आलू मटर की सब्जी बनाया हुआ था |

जब मैंने उस अल्लू मटर की सब्जी को खाया तो वो मुझ स्वादिस्ट लगी इसलिए मैंने उस आलू मटर की सब्जी के आलावा और कुछ नही खाया | मेरे दादा के घर पर जब भी कोई स्वादिस्ट सब्जी बनती थी तो मै उस दिन रोटी के साथ केवल सब्जी खाया करता था | वर्ना बाकि दिन सब्जी के साथ मै दाल और चावल खाया करता था | जब मै उस लड़के के घर सब्जी पहुचाने के लिए जाया करता था तब मुझे उसके घर पर एक लड़की दिखाई दिया करती थी  | मै उस लड़के के घर पर घुस गया तब उसने मुझे मिटाई खाने के लिए दिया | उस लड़के से कुछ महीने बाद मेरी दोस्ती हो गयी | लेकिन ये वो लड़का था जिसने उसकी मा को एक कमरे में नंगा करके चोदा था |

उसकी मा जब उससे चुदवाती थी तब ऐसा लगता था की वो कई साल बाद किसे से चुदवा रही है | मैंने उसकी मा की चुदाई का नजारा देखा था वो लड़का बिस्तर पर लेटा हुआ था तब उसका लंड उसकी मा के चूत में घुसा हुआ था और उसकी मा उसके लंड अपनी चूत में उसके हाथो से डालकर दक्के लगा रही थी | जब उस लड़के से मेरी दोस्ती हो गयी तो मै अक्सर उसके घर जाया करता था | वो लड़का भी मेरे दादा के घर पर आकर दादा से दुनियाभर की बाते किया करता था | उसकी बाते सुनकर मुझे देश दुनिया के विषय में मालूम चलता था | मुझे जब घूमना रहता था तब मै उस लड़के को लेकर घुमने के लिए जाया करता था | उस लड़के को भी घूमना पसन्द है इसलिए वो अक्सर मेरे साथ घुमा करता था | एक दिन मै उस लड़के के घर कुछ मिटाई देने के लिए गया था तब मैंने जो देखा उसे मै बया नही कर सकता हूँ | वो लड़का उसकी मा को चोद रहा था | मुझे उस दिन उस लड़के की जो असलियत मालूम चला था उसके आधार पर मैंने पाया था की वो लड़का एक ऐसा लड़का था जो उसकी मा को चोद सकता है | मुझे उस दिन जो देखने को मिला था उसने मुझे अचम्भे में डाल दिया | मै चकित था क्योकि कोई लड़का ऐसा कारनामा भी कर सकता है | उस कारनामा के बाद भी लेकिन मैंने उस लड़के से दोस्ती नही तोडा | मुझे उस लड़के के विषय में कुछ और भी मालूम करना था इसलिए मैंने उस लड़के से दोस्ती बनाकर रखा | जब मेरी तनखा होती थी तब मै मिटाई खरीद कर लाता था और सब लोगो को बाटा करता था | उस लड़के के साथ मै दारु की पार्टी बनाया करता था | जब हम लोग दारु की पार्टी बनाया करते थे तो हम लोग 300 रुपय देकर पार्टी बनाया करते थे |

मेरी तरफ से 300 रुपय दिया जाता था और वो लड़का भी 300 रुपय देता था | क्योकि मै पहेली बार किसी बेटे को उसकी मा को चोदते हुए देख रहा था | उसकी मा को चोदते समय उसकी मा आवाज कर रही थी | उस लड़के ने उसकी मा की चूत में उसका लंडा अन्दर डाल दिया | वो उसकी मा के दूद को दबा रहा था | चोदने के लिए उसने उसकी मा के कपडे को उतर दिया था | मै उस लड़के की कही हुई बातो को सुन रहा था | वो लड़का कह रहा था अरे रानी तुम्हे चोदने का अवसर खास है और उसकी मा कह रही थी चोद मेरे राजा | फिर उसकी मा उसका लंड चूस रही थी और वो लड़का आहा आहा कह रहा था | उसकी मा उसके बेटे के सामने नंगी खड़ी हुई थी | उसने उसकी मा के दूद को फिर पीना शुरु कर दिया | तभी मेरे घर से आवाज आया | मेरे दादा ने मुझे आवाज लगाया की तुम कहा हो | मै उस लड़के के घर के दरवाजे के पीछे छिप गया | मौका मिलते ही मै उस लड़के के घर से बाहर निकल गया | उसके घर पर एक लड़की महमान बनकर आई हुई थी | वो लड़की सुन्दर थी | वो लड़की उस लड़के की बहन थी वो उसकी मामी की लड़की थी | वो लड़का मेरा मित्र था इसलिए मै उसके घर उससे मिलने के लिए गया था उसने मुझे उस लड़की से मिलवाया और कहा की ये लड़की मेरी बहन है |

मेरी उस लड़की से दोस्ती हो चुकी थी इसलिए उस लड़की को कुछ खास देने के लिए मैंने बाजार से लडडू खरीद कर लाया और उसे उस दोस्त के घर ले कर गया | उस लड़की को लडडू पसन्द आया | उस लड़की ने लडडू की तारीफ किया | वो लडडू जो की मैंने लाया था एक प्रसिद्ध हलुवाई की बनाई हुई लडडू थी | वो हलुवाई शहर में प्रसिद्ध था क्योकि उसकी बनाई हुई लडडू काफी लाजवाब हुआ करती थी | मै उसकी बनाई हुई लडडू को अक्सर खाया करता था | उसकी बहन पुणे से आई थी | वो लड़की पुणे में रहती थी लेकिन उसके पापा शिमला और उसकी मा रायपुर में रहती थी | लड़की का घर पुणे में था | इसलिए वो लड़की वहा रहा करती थी | उस लड़की के मा और पापा अलग जगह में रहा करते थे | जब उस लड़की से मेरा परिचय हो चूका था |  तब मै उस लड़की से मिलने के लिए उसके शहर पुणे भी गया था | उस समय मेरे मामा के घर पर एक उत्सव बनाया जा रहा था | उत्सव के समय मेरे मामा के घर पर कई सारे महमान आये हुए थे | मै भी मामा के घर पर महमान बनकर आया करता था | जब मै घर पर पहुचा तो मेरे मामा ने बताया की तुम्हारी मामी कही बाहर गयी है इसलिए उत्सव में तुम्हे सब कुछ करना पड़ेगा | उत्सव की तयारी करने में जुट गया |

मेरे मित्र का फोन आया और उसने मुझ से हाल चाल पूछा और उसको मैंने बताया सब कुछ ठीक है | फिर उसने उसकी बहन के विषय में पूछा | मेरे मित्र ने मुझे बताया की उसकी बहन भी पुणे में रहती है | मुझे जब उसकी बहन के विषय में मुझे मालूम चला इसलिए एक दिन मै उस लड़की के घर के सामने से गुजरा और उसने मुझे पहचान लिया | जब उसने मुझे पहचाना तो मेरे मित्र को फोन लगाया की तुम्हारी बहन को मैंने पुणे में देखा है | मुझे उस लड़की को गर्लफ्रेंड बनाना था | मैंने उस लड़की के सारे परिचित के विषय में मालूम कर लिया | अब मैंने उस लड़की के सारे परिचितो से दोस्ती कर लिया था | जब सब लोग से दोस्ती हो चुकी थी | तब एक दिन मैंने उस लड़की के पापा से परिचय बना लिया | उस लड़की के पापा को एक खास आयोजन में बुलाया और वो लड़की भी आयी थी | मैंने अपनी बहन से उस लड़की को सहेली बनाने के लिए कहा | जब वो उसकी सहेली बन गयी तो वो मेरी बहन से मिलने के लिए मेरे मामा के यहा आया करती थी | मुझे जब उसने देखा तो उसने मुझ से बात करना शुरु कर दिया और वो मेरी गर्लफ्रेंड बन गयी |