क्लब में आने वाली शादीशुदा महिला की गांड


antarvasna chudai ki kahani

मेरा नाम आकाश है मैं करनाल का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 24 वर्ष है परंतु हमारे घर की स्थिति कुछ ठीक नहीं है इसी वजह से मुझे एक दुकान में काम करना पडता है। उस दुकान में मैं पिछले 2 वर्षों से काम कर रहा हूं और मैंने जैसे-तैसे अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली है। मेरे परिवार की स्थिति कुछ ठीक नहीं है, मेरे पिताजी ने बहुत मेहनत की परंतु उसके बावजूद भी वह अपने जीवन में कुछ भी नहीं कर पाए, इसी लिए हमारे घर की भी आर्थिक स्थिति बुरी हो गई। मेरे पिताजी ने मेरी बड़ी बहन की शादी हमारे रिश्तेदारों की मदद से करवाई परंतु मेरी छोटी बहन की जिम्मेदारी मुझ पर ही है इसीलिए मैं चाहता हूं कि मैं कुछ अच्छा करूं परंतु मेरे जीवन में कुछ भी नया नहीं हो रहा है और ना ही मुझे  कुछ अच्छा दिखाई दे रहा है।

मैं सुबह अपने घर से काम के लिए निकलता हूं और शाम के वक्त ही घर लौटता हूं। मैं अपने काम से बहुत ज्यादा थक जाता हूं और मुझे बिल्कुल भी वक्त नहीं मिलता कि मैं अपने लिए भी समय निकाल पाऊं। मेरी तनख्वाह से जो भी पैसे मिलते हैं वह मैं आधे घर पर दे देता हूं और कुछ अपने पास रखता हूं। मैं जिस दुकान में काम करता हूं वहां के मालिक के घर में पार्टी थी। उनके छोटे बच्चे का बर्थडे था इसलिए उन्होंने अपने सारे रिश्तेदारों को इनवाइट किया हुआ था और उनके कुछ दोस्त भी आने वाले थे, वह मुझसे कहने लगे कि तुम बहुत अच्छा गिटार बजा लेते हो तो तुम यदि मेरे बच्चे की पार्टी में गिटार बजाओगे तो मुझे बहुत खुशी होगी। मुझे गाने का भी शौक है और मैं गिटार भी बहुत अच्छा बजाता हूं, यह मैंने अपने मामा से सीखा है, वह भी गिटार बजाया करते थे और मैं भी उनके साथ सीखता था। जब मेरे दुकान के मालिक ने कहा तो मैंने उन्हें कहा ठीक है। जिस दिन उनकी पार्टी थी उस दिन उनके घर पर काफी भीड़ थी और उनके सारे रिश्तेदार और दोस्त आए हुए थे। पहले तो वह सब लोग आपस में बात कर रहे थे और उसके बाद दुकान के मालिक मेरे पास आये और कहने लगे कि तुम गाना शुरू कर दो। मैंने जब गाने के साथ गिटार भी बजाया तो सब लोग बहुत खुश हुए और सब लोग तालियां बजाने लगे। मुझे भी अंदर से बहुत खुशी होती है जब मैं गिटार बजाता हूं।

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मुझे बहुत ही शौक है गिटार बजाने का और इसी वजह से मैं उस दिन बहुत खुश था। उस दिन मैं पार्टी में ही था और उसके बाद मैं भी अपने घर चला गया। जब मैं अपने घर गया तो उस दिन मैंने अपने माता पिता के साथ बैठकर बात की, उसके बाद मैं सोने के लिए चला गया। अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो हमारे घर पर एक व्यक्ति आये हुए थे, मैंने उन्हें इससे पहले कभी भी नहीं देखा था और वह मुझे कहने लगे कि तुम्हारा ही नाम आकाश है, मैंने उन्हें कहा कि हां मेरा नाम ही आकाश है। मैंने उनसे कहा कि मैंने आपको आज से पहले कभी नहीं देखा और ना ही मैं आपको पहचानता हूं, वह कहने लगे कि मैं मुंबई का रहने वाला हूं और कल जिस पार्टी में तुम गाना गा रहे थे वहीं पर मैं भी था। उन्होंने मेरी बहुत तारीफ की और कहने लगे कि तुम बहुत ही अच्छा गिटार बजाते हो और गाना भी अच्छा गाते हो। वह मुझसे बहुत प्रभावित हुए, वह मुझे कहने लगे कि मेरा मुंबई में एक क्लब है यदि तुम मेरे साथ मुंबई चलो तो तुम वहीं पर अपना शौक पूरा कर लेना और मैं तुम्हें उसके बदले अच्छे पैसे भी दे दूंगा। मुझे पहले कुछ भी समझ नहीं आया कि मुझे क्या करना चाहिए क्योंकि मैं ही घर का सारा खर्चा संभालता हूं और मेरे माता पिता को मैं छोड़ कर बिल्कुल भी नहीं जाना चाहता था। उन्होंने मुझे कहा कि यदि तुम मेरे साथ आने के लिए तैयार हो तो मैं तुम्हें कुछ एडवांस दे देता हूं क्योंकि मैंने उनसे अपनी सारी समस्याएं बता दी थी, मेरी समस्या यह थी कि मेरे माता-पिता को मैं छोड़ कर जाना नहीं चाहता था और यदि मैं मुंबई जाता तो मुझे कुछ पैसों की भी आवश्यकता थी इसलिए उन्होंने मुझे पैसे दे दिये। अब मैं उनके साथ जाने के लिए तैयार हो गया और कुछ दिनों बाद हम लोग मुंबई चले गए। जब मैं मुंबई पहुंचा तो मुझे अपने घर की बहुत याद आ रही थी लेकिन फिर भी मुझे कुछ काम करना था इसलिए मैं अपने काम में ही ध्यान दे रहा था।

जब मैं उनके क्लब में गया तो वहां पर सब पैसे वाले लोग आते थे, वह मुझे कहने लगे कि अबसे तुम यहां पर म्यूजिक का सारा काम देखोगे। उन्होंने मुझे और भी लोगों से मिलाया जो कि वहां पर काम करते थे। अब मैं उनके क्लब में ही गिटार बजाता था और गाना भी गाता था। जितने भी लोग वहां आते थे वह खुश हो जाते थे। मैं कुछ पैसे अपने घर पर भिजवा दिया करता था। मुंबई में मैं खुशी था क्योंकि मैं जहां पर काम कर रहा हूं उन्होंने मुझे रहने के लिए भी एक घर दिया हुआ है इस वजह से मुझे बहुत अच्छा लगता है और मैं अपने काम में मन लगा पाता हूं। जब भी मेरे माता-पिता मुझसे फोन में बात करते तो वह बहुत खुश होते थे और कहते थे की तुम इसी प्रकार से काम करो और मेहनत करते रहो। मेरे पिताजी ने मेरी बहन के लिए भी कोई रिश्ता देख लिया था इसलिए मैं बहुत ही खुश था। मैं जहां पर काम करता हूं उनसे मैंने कहा कि मुझे कुछ पैसे एडवांस में चाहिए क्योंकि मेरे  पिताजी ने मेरी बहन के लिए लड़का देख लिया है और कुछ समय बाद वह उसकी शादी करवा देंगे। वह कहने लगे ठीक है मैं तुम्हें कुछ पैसे एडवांस दे देता हूं। मैंने उनसे पैसे एडवांस ले लिए थे और मैंने वह पैसे अपने घर भिजवा दिये। अब मेरे पिताजी ने मेरी बहन की सगाई करवा दी और कुछ समय बाद ही उसकी शादी भी होने वाली थी। उसी सिलसिले में कुछ दिनों के लिए मैं घर भी चला गया।

जब मैं घर पर गया तो मेरे माता-पिता मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और हम लोगों ने शादी की बहुत अच्छे से तैयारियां करवाई और फिर मेरी बहन की शादी भी हो गयी। कुछ दिनों तक मैं घर पर ही था, मैं जब वापस मुंबई लौटा तो मैं अपने काम पर लग गया। मैं अपने काम पर बहुत ही अच्छे से ध्यान दे रहा था। सब लोग मेरे गाने की बहुत तारीफ करते थे और कहते थे कि तुम गिटार बहुत ही अच्छा बजा लेते हो। उसी क्लब में एक महिला आती थी उनका नाम सुहानी है। वह मुझसे कहती हैं कि तुम बहुत ही अच्छा गाना गाते हो। पहले मैं उनसे ज्यादा संपर्क नहीं रखता था परंतु जब मैंने उनसे एक दिन पूछा कि आप हमेशा ही क्लब में आती हैं लेकिन आप अकेले आते हैं, वह कहने लगी कि मेरे पति और मेरे बीच में बिल्कुल भी बात नहीं होती इसी वजह से मैं क्लब में आ जाती हूं। वह बहुत ही पैसे वाली थी लेकिन अपने शादीशुदा जीवन से बिल्कुल भी खुश नहीं थी। उनकी उम्र 30 वर्ष के आसपास की रही होगी। जब भी वह क्लब में आती तो मुझे देख कर बहुत खुश होती थी। मुझे उससे बात करना बहुत अच्छा लगता था और वह भी मुझसे बात करके बहुत खुश होती थी। एक दिन वह मुझे कहने लगे कि यदि तुम्हारे पास वक्त हो तो हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं, मैंने उन्हें कहा कि मेरे पास इतना समय तो नहीं होता परंतु कुछ समय मैं निकाल सकता हूं। उस दिन हम लोग मॉल में बैठे हुए थे और मुझे सुहानी से बात करना बहुत अच्छा लग रहा था। वह भी मुझसे बात करते हुए बहुत खुश हो रही थी। मैंने उनसे उनके शादी के बारे में पूछा तो वह कहने लगी कि मैं अपनी शादी से बिल्कुल भी खुश नहीं हूं, मेरे पति ना तो मुझे वक्त दे पाते हैं और ना ही हम दोनों के बीच में प्यार है। हम दोनों साथ में बैठकर काफी बातें कर रहे थे। उसके बाद वह मुझे कहने लगी कि तुम मेरे घर पर चलो मैं जब उसके घर गया तो सुहानी ने मेरे सामने ही अपने कपड़े खोल दिए। उसका फिगर इतना सॉलिड था कि मैं उसे देखता रह गया।

मैंने जैसे ही उसके स्तनों को अपने हाथ से दबाया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और मैंने उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूसने शुरू कर दिया। सुहानी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और वह भी पूरी उत्तेजना में आ गई जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। उसने चूसते चूसते मेरा लंड से पानी बाहर निकाल दिया मैंने भी उसे बिस्तर पर लेटाते हुए उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया और बहुत देर तक मैं उसकी योनि का रसपान का करता रहा। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसकी योनि को चाट रहा था। मैंने जब अपने लंड को उसकी योनि में डाला तो वह मचलने लगी और मेरा लंड जब उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था तो उसे बहुत मजा आ रहा था वह पूरे ही मूड में आने लगी। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था मैं जिस प्रकार से उसे चोदे जा रहा था। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी वह मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। मैंने काफी समय तक उसे ऐसे ही चोदा लेकिन मैं उसकी चूत की गर्मी को ज्यादा देर तक झेल नहीं पाया इसलिए मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गिर गया। जब मेरा वीर्य उसकी चूत में गया तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसे घोड़ी बना दिया। उसको मैंने कहा कि तुम मुझे सरसों का तेल दे दो उसने जब मुझे सरसों का तेल दिया तो मैंने उसे अपने पूरे लंड पर लगा दिया और थोड़ा बहुत मैंने उसकी गांड में भी लगा दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को  सुहानी की गांड के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेज गति से धक्के देने लगा मैंने उसे इतनी तेज त झटके मारे कि उसका पूरे शरीर हिलने लगा और उसकी गांड से भी खून आने लगा। उसकी गांड से चिपचिपा पदार्थ बाहर की तरफ निकाल रहा था और मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था लेकिन उसकी गांड से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकल रही थी उसी गर्मी में मेरा वीर्य उसकी गांड में गिर गया। उसके बाद सुहानी ने मुझे कुछ पैसे दिए और अब मैं उसके घर पर ही आता जाता रहता हू।

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