फिगर तो दिखा दो


Hindi sex story, kamukta मैंने करीब एक महीने पहले ही गाजियाबाद में नौकरी ज्वाइन की थी मैं हमेशा दिल्ली से गाजियाबाद जाया करता था मैंने जिस ऑफिस में नौकरी ज्वाइन की थी उसी ऑफिस में मेरा एक दोस्त बना उसका नाम निखिल है, निखिल से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई निखिल दिल का बहुत ही अच्छा है और वह मेरे लिए टिफिन अपने घर से बना कर ला जाता था मैं उसे हमेशा पूछता यार तुम्हारा टिफिन कौन बनाता है तो वह कहता कि यह तो मेरी बहन बनाती है मैंने उससे कहा की वह तो खाना बहुत ही अच्छा खाना बनाती है लगता है उसके हाथ मे जादू है अब तो तुम्हारी बहन से एक बार मिलना ही पड़ेगा निखिल ने कहा क्यों नहीं जब तुम्हें समय मिलेगा तो तुम घर पर आ जाना, मैंने उसे कहा तुम्हें तो पता ही है कि ऑफिस से निकलने का तो टाइम ही नहीं है इसलिए शायद तुम्हारे घर पर आना संभव नहीं है लेकिन फिर भी कोशिश करूंगा कि तुम्हारे घर पर आ जाऊं निखिल मुझे कहने लगा तुम्हें समय तो निकालना ही पड़ेगा तभी तो तुम मेरे घर पर आ पाओगे और इससे अच्छा और स्वादिष्ट खाना खाना है तो तुम्हें उसके लिए मेरे घर पर आना पड़ेगा मैंने कहा ठीक है मैं तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा।

उसके बाद मैं अपने घर पर आ गया, कुछ दिन बाद मैं उसके घर पर चला गया उसने मुझे अपने घर का पता दे दिया था इसलिए मुझे उसके घर पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हुई। जब मैं उसके घर पहुंचा तो मैंने देखा घर में कोई भी नहीं है मैंने निखिल से पूछा यार तुम्हारे घर में तो कोई दिखाई ही नहीं दे रहा तो वह मुझे कहने लगा देखो संजीव मैंने यह बात आज तक किसी को नहीं बताई कि मेरे माता-पिता का देहांत हो चुका है मैंने ऑफिस में भी यह बात किसी को बताई नहीं है सिर्फ तुम्हे ही बता रहा हूं ना जाने तुमसे इतने कम समय में ही इतनी अच्छी दोस्ती कैसे हो गई और जब से तुम से मेरी दोस्ती हुई है तो मैंने कभी भी तुम्हारे बारे में कुछ गलत नहीं सोचा इसीलिए तो मैंने तुम्हें घर पर बुलाया और तुम्हें अब मेरे बारे में तो सब कुछ पता चल ही चुका होगा।

मैंने जब निखिल से पूछा कि तुम्हारे माता-पिता का देहांत कैसे हुआ तो वह कहने लगा ना जाने उन्हें ऐसा क्या हो गया कि उन दोनों की कुछ ही समय के अंतराल में मृत्यु हो गई और मेरे सर से माता पिता का साया छूट गया मैं बहुत ज्यादा दुखी था लेकिन वह तो मेरी बहन मीनाक्षी ने मेरा बड़ा साथ दिया यदि वह मेरे साथ नहीं होती तो शायद मैं भी पूरी तरीके से टूट चुका होता लेकिन उसकी बदौलत मैं अपने आप को संभाल पाया और अब एक अच्छी जिंदगी जी रहा हूं। जब मुझे निखिल ने यह बात बताई तो मैंने उसे कहा यार तुमने तो वाकई में बहुत ही कष्ट झेले हैं लेकिन तुम्हारे चेहरे पर कभी भी मैंने तनाव या परेशानी नहीं देखी, मुझे निखिल कहने लगा यार अब मेरे ऊपर मीनाक्षी की जिम्मेदारी है और अब मैं कैसे उसकी जिम्मेदारियों से भाग सकता हूं इसलिए मैंने नौकरी करने की सोची और जिस कंपनी में मैं नौकरी कर रहा हूं उस कंपनी में मुझे काम करते हुए करीब तीन चार साल हो चुके हैं मैंने निखिल से कहा लेकिन तुम्हारी सब लोग बहुत तारीफ किया करते हैं। जब हम दोनों आपस में बात कर रहे थे तभी मीनाक्षी भी आ गयी और जैसे ही मीनाक्षी आई तो मीनाक्षी ने मुझे कहा कि आप संजीव हो? मैंने उसे कहा हां मेरा नाम संजीव है तुम्हें कैसे पता चला कि मैं ही संजीव हूं तो मुझे निखिल ने कहा यह मेरी बहन मीनाक्षी है लेकिन मुझे क्या पता था कि मीनाक्षी और निखिल के बीच हमेशा ही मुझे लेकर बात होती रहती है मीनाक्षी भी हमारे साथ बैठ गई तो मैंने मीनाक्षी से कहा यार तुम खाना तो बड़ा ही टेस्टी बनाती हो और जब भी निखिल टिफिन लेकर आता है तो मैं हमेशा उसके टिफिन से खाना खा लेता हूं, मुझे मीनाक्षी कहने लगी हां तुम बिलकुल सही कह रहे हो मुझे खाना बनाने का बहुत शौक है और मैं हमेशा ही भाई के लिए कुछ ना कुछ नया बनाती रहती हूं जिससे कि भैया भी खुश रहते हैं। मीनाक्षी ने मुझे बताया कि निखिल ने उसका किस प्रकार से ध्यान रखा और कभी भी उसे कोई कमी नहीं होने दी मुझे मीनाक्षी ने यह बात कही तो मैंने उस वक्त मीनाक्षी से कहा तुम बहुत ही खुशनसीब हो जो तुम्हें निखिल जैसा भाई मिला आज के जमाने में ऐसा व्यक्ति मिल पाना संभव नही है।

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निखिल कहने लगा यार यह तो मुझे करना ही था मैं भला मीनाक्षी की जिम्मेदारियों से कैसे भाग सकता था यदि मैं उसकी देखभाल और उसके बारे में नहीं सोचता तो उसके बारे में और कौन सोचता मैंने निखिल से कहा लेकिन आज के जमाने में तो सब लोग एक दूसरे का साथ छोड़ ही देते हैं परंतु तुमने मीनाक्षी का बड़े अच्छे से ध्यान रखा है और उसे कभी भी अपने माता-पिता की कमी महसूस नहीं होने दी, निखिल मुझे कहने लगा अब यह बात छोड़ो तुम यह बताओ तुम्हारे घर में सब लोग कैसे हैं तो मैंने निखिल से कहा मेरे घर में तो सब लोग ठीक है और शायद कुछ दिनों बाद पापा का भी ट्रांसफर होने वाला है निखिल मुझे कहने लगा लेकिन तुम्हारे पापा कहां जॉब करते हैं? मैंने निखिल से कहा मेरे पापा पुलिस में है और उनका कुछ समय बाद ट्रांसफर होने वाला है, निखिल मुझे कहने लगा यार मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे पापा पुलिस में है। दरअसल इससे पहले हमारे बीच कभी भी एक दूसरे के परिवार को लेकर कोई बात हुई ही नहीं थी लेकिन जब हम दोनों को एक दूसरे के परिवार के बारे में पता चलने लगा तो उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे, मुझे क्या पता था निखिल दिल का इतना अच्छा होगा लेकिन उसने जब मुझे अपने बारे में बताया तो मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं उन लोगों के साथ अपना अच्छा समय बिता कर बहुत खुश था।

अगले दिन जब मैं ऑफिस में गया तो निखिल ऑफिस में ही था मैंने निखिल से कहा तुम एक दिन मीनाक्षी को लेकर हमारे घर पर आना मैंने कल अपनी मम्मी को तुम्हारे बारे में बताया तो मम्मी ने कहा तुम निखिल को घर पर ले आना। एक दिन निखिल और मीनाक्षी को मैं अपने घर लेकर गया जिस दिन वह लोग मेरे साथ घर पर आए तो वह लोग भी बहुत खुश थे और उनकी खुशी इस बात से थी की वह मेरी मम्मी से मिले,  मम्मी से मिलकर वह बहुत खुश हो गए थे मेरी मम्मी बहुत ही फ्रैंक हैं और उनका नेचर बहुत अच्छा है वह बड़े ही शालीनता और सभ्यता से बात करती हैं उनके बात करने का तरीका बहुत अच्छा है। इस वजह से निखिल और मीनाक्षी मेरी मम्मी से बहुत प्रभावित हैं और उन्होंने मम्मी को कहा आंटी कभी आप हमारे घर पर आइएगा लेकिन मम्मी कहने लगी कि बेटा मेरे पास तो समय ही नहीं होता है इसलिए मैं घर से कहीं बाहर जाती नहीं हूं परंतु फिर भी कोशिश करूंगी कि मैं तुम्हारे घर पर आऊं और उसके बाद मीनाक्षी और निखिल घर चले गए, जब वह लोग घर पर पहुंच गए तो निखिल ने मुझे फोन कर दिया था और कहां हम लोग घर पहुंच चुके हैं लेकिन शायद मैं मीनाक्षी को दिल ही दिल पसंद करने लगा था उसे भी मेरा साथ बहुत अच्छा लगता। एक दिन मीनाक्षी को मैंने अपने दिल की बात कह दी मीनाक्षी भी मना ना कर सकी और शायद इस बात से निखिल को भी कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि वह भी मीनाक्षी को खुश देखना चाहता था। अब हमारे रिश्ते से किसी को भी कोई दिक्कत नहीं थी मीनाक्षी भी मेरी हो चुकी थी निखिल भी इस बात से बहुत खुश था। मीनाक्षी और में घंटों तक फोन पर बातें किया करते और एक दूसरे के साथ हमे फोन पर बातें करना अच्छा लगता पहले तो मैं मीनाक्षी से बड़े ही अच्छे तरीके से बात किया करता था लेकिन धीरे-धीरे जब हम दोनों की बातें काफी ज्यादा होने लगी तो एक दिन मैंने मीनाक्षी से उसका फिगर पूछ लिया वह मुझे नहीं बता रही थी।

मैंने उससे कहा कोई बात नहीं मैं खुद देख लूंगा। एक दिन मैं ऑफिस से छुट्टी लेकर जल्दी चला गया मैं मीनाक्षी से मिलने घर पर गया निखिल ऑफिस में ही था, मीनाक्षी घर पर थी। मीनाक्षी से मैंने कहा आज तो मैं तुम्हारा फिगर देखकर ही रहूंगा मीनाक्षी कहने लगी शादी से पहले मैं यह सब नहीं कर सकती वह शरमाते हुए वहां से बेडरूम की तरफ को भागी जब वह बेडरूम की तरफ गई तो मैंने उसे पकड लिया और उसे बिस्तर पर लेटा दिया। उसका कोमल बदन मेरे शरीर के नीचे था मैंने उसे पूरी तरीके से अपने काबू में कर लिया था पहले तो मैं उसके होठों को चूमता, वह मुझसे अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करती लेकिन मैंने उसे हिलने तक नहीं दिया और उसके दोनों हाथों को मैंने कस कर पकड़ लिया। उसके होंठो को मुझे चूमने में बड़ा मजा आता मैंने जैसे ही उसके स्तनों को चूमना शुरू किया तो उसके मुंह से चीख निकलने लगी वह कहने लगी संजीव तुम यह सब मत करो उससे भी अब बिल्कुल कंट्रोल नहीं हो रहा था।

मैंने उसके कपड़े उतार दिए और उसके स्तनों को चूसना शुरू किया, मैंने धीरे-धीरे उसकी योनि को भी चटाना शुरू किया उसकी योनि से पानी बाहर निकलने लगा, उसकी योनि से पानी निकलने लगा तो मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगा दिया जैसे ही मैंने अपने लंड को उसके योनि पर लगाया तो वह चिल्लाने लगी। मैंने धीरे धीरे अपने लंड को उसकी योनि में घुसा दिया मेरा लंड पूरा भी नहीं घुसा था उसकी योनि से इतना ज्यादा खून निकलने लगा कि वह मुझे कहने लगी मुझे तो डर लग रहा है परंतु मैंने अपने लंड को धक्का देते हुए उसकी योनि के अंदर घुसा दिया। उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकली मेरा लंड उसकी योनि के अंदर चला गया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया तो उसे बहुत दर्द महसूस होने लगा वह चुपचाप लेटी थी मैंने उसे तेजी से धक्के देने शुरू कर दिया जिससे कि मीनाक्षी के अंदर से गर्मी निकलने लगी लेकिन उस दर्द में उसे मजा भी आ रहा था इसीलिए तो वह अपने पैरों को मेरी कमर पर रखने लगी। मैं उसकी योनि के मजे 5 मिनट तक ले पाया 5 मिनट बाद मेरा वीर्य मीनाक्षी की योनि में गिर गया तो वह कहने लगी आज तो तुमने मेरा फिगर देख लिया, मैंने उसे कहा तुम्हारा फिगर तो बड़ा लाजवाब है।

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