होटल में काम करने वाली के साथ सेक्स संबंध


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मेरा नाम अमन है मैं मेरठ का रहने वाला हूं, मैंने मेरठ के कॉलेज में एडमिशन लिया है और मैं यहां से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा हूं, मेरी उम्र 24 वर्ष है। मेरे मामा मुझे कहने लगे कि तुम कुछ समय किसी अच्छे होटल में काम कर लो, उसके बाद मैं तुम्हें अपने पास विदेश बुला लूंगा। मेरे मामा विदेश में काफी समय से काम कर रहे हैं और वह वहां पर एक बहुत बड़े शहर में हैं इसीलिए वह मुझे कहते हैं कि तुम पहले कुछ काम सीख लो उसके बाद मेरे पास आ जाना। मैं अभी अपने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर ही रहा हूं,  यह मेरा पहला वर्ष है। मेरे कॉलेज में मेरे कई दोस्त बने और उनसे मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई लेकिन मुझे नहीं पता था कि उनमें से कई लड़के बहुत ही आजाद किस्म के हैं, जो कि सिर्फ मजे के लिए ही होटल मेजरमेंट कर रहे हैं।

मैं भी पहले उनके साथ ही रहता था लेकिन जब बाद में वह कुछ ज्यादा ही अय्याशी करने लगे तो मुझे उनके साथ रहना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था क्योंकि मैं उस प्रकार का नहीं हूं, जिस प्रकार से वह लोग है। वह शराब पीकर कुछ ज्यादा ही हुड़दंग मचाते हैं। कई बार वह पुलिस स्टेशन भी जा चुके हैं क्योंकि उनके खिलाफ कॉलेज की लड़कियों ने शिकायत की थी। मैं जब सोचता हूं कि मैंने बहुत अच्छा किया जो मैं उनके साथ नहीं रहता यदि मैं भी उनके साथ रहता तो शायद मुझे भी उस दिन पुलिस स्टेशन जाना पड़ता और उस दिन के बाद से उन्हें बहुत ही बदनामी का सामना करना पड़ा। हमारे कॉलेज के जितने भी प्रोफेसर हैं, वह सब कहने लगे कि इन्हें कॉलेज से निकाल देना चाहिए लेकिन उनके घरवालों ने बहुत रिक्वेस्ट की और उसके बाद उन लोगों को एक मौका दिया गया, इसलिए वह कॉलेज में हैं और हमारी क्लास में ही पढ़ रहे हैं। अब वह लोग बिल्कुल भी शैतानी नहीं करते और सिर्फ अपने होटल मैनेजमेंट की क्लास में है रहते हैं। ऐसे ही हम लोगों का समय बितता गया और मुझे पता भी नहीं चला कि कब मेरे होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी हो चुकी है।

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हमारे कॉलेज में कई बड़े होटलों के मैनेजर आए थे, जिन्होंने कि हमारा इंटरव्यू लिया। उनमें से मेरा एक होटल में सिलेक्शन हो गया, वह मुंबई में है। मुझे शुरुआत में बहुत कम तनख्वाह मिल रही थी लेकिन मैं काम सीखना चाहता था इसी वजह से मैंने वहां ज्वाइन कर लिया। जब मैंने मुंबई आने के बारे में अपने माता पिता को बताया तो वह कहने लगे कि तुम वहां पर अकेले कैसे रहोगे, मैंने उन्हें कहा कि वह बहुत ही बड़ा होटल है यदि वहां मैं कुछ समय तक काम करूंगा तो उसके बाद मैं मामा के साथ विदेश जा सकता हूं। मुझे मेरे मामा के साथ ही विदेश जाना था इसलिए मैं वहां पर काम करने के लिए तैयार हो गया। मेरे पिताजी कहने लगे, मैं तुम्हारे साथ ही मुंबई आऊंगा और तुम्हारे लिए रहने का पहले मैं पर बंदोबस्त कर देता हूं। मैंने उन्हें कहा ठीक है जैसा आपको उचित लगता है, आप कीजिए और वह मेरे साथ ही मुंबई आने के लिए तैयारी करने लगे। उन्होंने ट्रेन की टिकट कर दी। उनके एक पुराने मित्र हैं जो कि मुंबई में काफी समय से रह रहे हैं, उन्होंने उन्हें भी फोन कर दिया। हम लोग जब ट्रेन में बैठे हुए थे तो मेरे पिताजी मुझे बहुत समझा रहे थे और कह रहे थे कि तुम मुंबई जैसे बड़े शहर में रहोगे तो तुम अपना ध्यान रखना और जब मैं स्टेशन आया तो मेरी मां भी मुझे स्टेशन तक छोड़ने के लिए आई थी, वह भी मुझे बहुत समझा रही थी कि तुम समय पर खाना खा लिया करना और तुम मुझे फोन करते रहना। मेरे पिताजी ने मुझे बहुत समझाया क्योंकि हम दोनो ट्रेन में बैठे हुए थे इसलिए हम दोनों को समय मिल पा रहा था। जब हम मुंबई पहुंच गए तो मेरे पिताजी ने अपने दोस्त को फोन किया और वह उन्हें लेने के लिए स्टेशन आ गए। जब वह स्टेशन आए तो मेरे पिताजी और उनके दोस्त आपस में गले मिल गए और वह अंकल कहने लगे कि तुम बिल्कुल भी बदले नहीं हो, मेरे पिताजी भी उन अंकल से कहने लगे कि तुम भी बिल्कुल नहीं बदले हो तुम्हारी मूंछ पहले जैसी ही है और वह दोनों बहुत जोर जोर से हंसने लगे। मेरे पिताजी ने अपने दोस्त से मेरा परिचय करवाया, उनका नाम रविंद्र है।

वह मुझसे पूछने लगे कि तुम यहां पर क्या करने वाले हो, मैंने उन्हें बताया कि मेरी एक होटल में जॉब लगी है और मैं वहीं पर काम करने वाला हूं। हम लोग बातें करते-करते स्टेशन से बाहर सीढ़ियों से उतरे तो वहां पर बहुत सारे टैक्सी वाले खड़े थे और वह सब चिल्ला रहे थे कि हम आपको लेकर जाते हैं लेकिन वह अंकल अपनी कार लाए हुए थे। रविंद्र अंकल ने अपनी कार पार्किंग से निकाली और हमें अपने घर ले गए। जब वह हमें अपने घर ले गयर तो उनकी पत्नी भी हमसे मिलकर बहुत खुश हुई। मेरे पिताजी भी उनकी शादी के बाद उनसे इतने वर्षों बाद मिल रहे थे। उनका लड़का भी कॉलेज में पढ़ रहा है और उनका एक छोटा लड़का स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। मेरे पिताजी और रविंद्र अंकल आपस में बैठकर बात कर रहे थे और मैं उनके लड़के के साथ ही बैठा हुआ था। वह मुझसे पूछ रहा था कि आपने इसी वर्ष कॉलेज कंप्लीट किया है, मैंने उसे कहा कि हां मैंने इसी वर्ष अपने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की है और मेरी नौकरी एक होटल में लग चुकी है। मैं काफी देर तक उनके साथ ही बैठा हुआ था और उसके बाद मैं भी अपने पिताजी के साथ बैठ गया। जब मैं उनके साथ बैठा हुआ था तो रविंद्र अंकल कह रहे थे कि तुमने यह बहुत ही अच्छा किया कि यहां पर नौकरी करने का फैसला कर लिया। मेरे पिताजी ने रविंद्र अंकल से पूछा कि अमन का रहने के लिए तुम कहीं पर बन्दोबस्त करवा दो।

वह कहने लगे कि कुछ दिन तक तो अमन हमारे पास ही रह लेगा, मेरे पिताजी पचले मना करने लगे, वह कहने लगे कि इसका कहीं रहने के लिए कर ही दो लेकिन वह अंकल जिद करने लगे की कुछ दिन अमन हमारे साथ ही रह लेगा और मेरे पिताजी मान गए कि ठीक है कुछ दिनों तक अमन तुम्हारे साथ ही रह लेगा लेकिन उसके बाद तुम्हें उसके रहने की व्यवस्था करवानी होगी। वह कहने लगे तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो, मेरे काफी दोस्त हैं वह कहीं ना कहीं अमन के रहने के लिए करवा देंगे। मेरे पिताजी अब पूरे निश्चिंत हो चुके थे और वह एक दिन उनके घर पर रुके और अगले दिन ही चले गए। जब वह वापस गए तो मुझे भी बहुत बुरा लग रहा था। मैं भी अपने काम पर जाने लगा था। जब मैं अपने होटल में पहले दिन गया तो मुझे बहुत ही अजीब सा लग रहा था क्योंकि मैं किसी को भी नहीं जानता था और उसी दिन एक लड़की भी आई थी, उसका भी पहला ही दिन था उसका नाम रिया है और वह मुंबई की रहने वाली है। जब मेरी उससे मुलाकात हुई तो मैंने उसे बताया कि यह मेरा पहला दिन है तो वह मुझे कहने लगी कि मेरा भी यह पहला ही दिन है। अब हम दोनों के बीच दोस्ती हो गई थी, उस दिन मैंने उसका नंबर ले लिया। जब मैंने रिया का नंबर लिया तो उसे मैं शाम को जब अपने काम में होता तो फोन कर देता। रिया भी मुझसे बात करती थी और मैं उसे कहता कि मैं यहां पर बिल्कुल नया हूं, मुझे यहां के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है इसीलिए जिस दिन हमारी छुट्टी होती उस दिन हम दोनों साथ में जाया करते थे और मुझे उसके साथ टाइम स्पेंड करना अच्छा लगता था क्योंकि मेरे साथ का कोई भी दोस्त मुंबई में नहीं है और मैं अपने जीवन में पहली बार ही मुंबई आया हूं। रिया मुझे अपने दोस्तों से मिलवाती तो मुझे बहुत अच्छा लगता और हम दोनों ही अब साथ में काम कर रहे थे। मुझे उसके साथ काम करना भी बहुत अच्छा लगता था। रिया और मैं जब भी काम पर होते तो हम दोनों अपने काम पर ध्यान देते। उसके बाद जब हमे समय मिलता तो हम लोग आपस में बैठकर बात करते।

वह एक दिन मेरे साथ ही बैठी हुई थी और उस दिन वह मेरे बगल में मुझसे चिपक कर बैठी हुई थी। उसकी गांड से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकल रही थी। मुझे नहीं पता था कि रिया के अंदर भी मुझे देख कर सेक्स की भावना जाग रही है। मैंने जैसे ही उसके जांघ पर हाथ लगाया तो वह मचलने लगी मुझे भी बहुत अच्छा लगने लगा। उसके बाद हम दोनों ही एक कमरे में चले गए और वहां पर मैंने अपने लंड को रिया के मुंह में डाल दिया। उसने बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसा जिससे कि मेरा पानी बाहर की तरफ आने लगा। वह बहुत खुश होने लगी उसके बाद मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए और जैसे ही मैंने उसके स्तनों पर अपने लंड को लगाया तो वह मचल गई। मैंने उसके बाद उसके स्तनों का रसपान काफी देर तक किया। मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया और काफी देर तक मैंने उसकी योनि का रसपान किया। जब मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर लगाया तो वह बहुत गर्म हो गई थी। जैसे ही मैंने उसकी पिंक चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसकी योनि से खून निकलने लगा। मेरा लंड बड़ी मुश्किल से उसकी योनि के अंदर गया क्योंकि उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी और मुझसे बिल्कुल भी उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया नहीं गया। लेकिन जब मेरा लंड उसकी योनि में चला गया तो मैं उसे बड़ी तेज झटके मारने लगा। जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होता तो वह अपने मुंह से सिसकिया लेती  मुझे अपनी तरफ आकर्षित करती। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसे धक्के देता लेकिन मैं उसे ज्यादा समय तक चोद नहीं पाया क्योंकि उसकी योनि बहुत टाइट थी इसलिए मेरा माल उसकी योनि में गिर गया। जैसे ही मेरा माल उसकी चूत मे गया तो मैंने अपने लंड को निकालते हुए अपने रूमाल से साफ कर लिया उसने भी अपनी योनि को साफ किया। उसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और अपने काम पर लग गए। जब हम लोग अपने काम से फ्री हुए तो वह कहने लगी मेरी योनि से खून निकल रहा है और मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है।

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