इतना मोटा कैसे लूंगी


antarvasna, hindi sex story मुझे टूरिस्ट गाइड के तौर पर काम करते हुए करीब 8 वर्ष हो चुके हैं मैं जयपुर के पास ही एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं लेकिन मैं जयपुर में ही रहता हूं क्योंकि ज्यादातर मेरा काम जयपुर में ही होता है इसलिए मुझे जयपुर में ही रहना पड़ता है। मैंने आज तक काफी लोगों को टूरिस्ट गाइड की सर्विस दी है और जिन भी लोगों के साथ मैं गया हूं वह लोग हमेशा ही बहुत खुश हुए और मैंने उन्हें कोई भी दिक्कत नहीं होने दी मेरे पास विदेश से भी काफी लोग आते हैं लेकिन मुझे क्या पता था कि इस बार मेरे पास एक ऐसा परिवार आएगा कि उससे मेरा रिश्ता ही जुड़ से जुड़ जाएगा और उनकी लड़की से मेरी शादी भी हो जाएगी। मैं एक दिन दुकान में बैठकर चाय पी रहा था और साथ सिगरेट भी पी रहा था तभी एक व्यक्ति मेरे पास आया और कहने लगे क्या तुम्हारा नाम  रविंद्र है मैंने उन्हें कहा जी सर मेरा नाम ही रविंद्र है वह मुझे कहने लगे मेरा नाम वीरेंद्र शर्मा है मुझे यही पास में बैठे एक बच्चे ने बताया कि तुम तो टूरिस्ट का काम करते हो मैंने उन्हें कहा जी हां मै टूरिस्ट का काम करता हूं।

मैंने उनसे पूछा आपको क्या मुझसे कोई काम था वह कहने लगे हां क्या तुम हमें भी अपनी सर्विस दे सकते हो मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं मेरा तो यही काम है बस मैं चाय पी लेता हूं उसके बाद आपसे मिलता हूं, वह मुझे कहने लगे अभी तो मैं होटल में जा रहा हूं तुम होटल में ही आ जाना मैंने उन्हें कहा आप मुझे अपने होटल का नाम बता दीजिए और अपना रूम नंबर बता दीजिए उन्होंने मुझे होटल का नाम और रूम नंबर लिखकर दे दिया उसके बाद वह वहां से चले गए और कुछ देर बाद मैं भी चाय पी कर वहां चला गया मैं जब होटल में गया तो मैंने उनके दरवाजे की बेल बजाई उन्होंने दरवाजा खोल दिया और मुझे कहने लगे कि हम लोग रिसेप्शन में बैठ कर बात करते हैं हम लोग सीढ़ियों से उतरकर रिसेप्शन में आ गए और वहां पर बैठ कर बात करने लगे उन्होंने मुझसे पूछा तुम कितने साल से यह काम कर रहे हो मैंने उन्हें कहा मुझे करीब 8 वर्ष हो चुके हैं और 8 वर्षों में मैं जिनके साथ भी टूरिस्ट गाइड के तौर पर गया हूं उन्हें कभी कोई शिकायत नहीं हुई है और मैंने उन्हें कभी कोई परेशानी भी नहीं होनी दी।

वह मेरी बात से खुश हो गए और कहने लगे देखो रविंद्र मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं और तुम्हें तो मालूम ही है कि कितनी मुश्किल से मुझे समय मिल पाता है और मैं एक एक पैसे बचाकर अपने परिवार के साथ यहां घूमने आया हूं मैंने उन्हें कहा सर मैं आपका पूरा ख्याल रखूंगा और आप बिल्कुल भी इस चीज के लिए निश्चिंत रहें आपको कोई भी परेशानी नहीं आएगी वह मुझे कहने लगे मुझे तुमसे मिलकर बहुत अच्छा लगा और तुम एक काम करना कल सुबह के वक्त आ जाना आज तो हम लोग यहीं पर रुके हैं और आसपास शाम के वक्त घूमने निकल जाएंगे, मैंने उन्हें कहा जी सर बिल्कुल मैं आपसे कल आकर मिलता हूं। उन्होंने मुझे कुछ पैसे दे दिए और उसके बाद मैं भी अपने घर चला गया उस दिन तो मेरी सिर्फ वीरेंद्र जी से ही बात हो पाई और मैं उनसे बात कर के बहुत अच्छा भी महसूस कर रहा था क्योंकि उनका व्यवहार बड़ा अच्छा था और जब कोई ऐसे व्यक्ति आपको मिल जाते हैं जो कि बात करने में बड़े ही सत्य और व्यावहारिक हो तो खुद ही अच्छा लगता है इसलिए मुझे वीरेंद्र जी से बात कर के बहुत अच्छा लगा मैं जब अगले दिन सुबह उनके पास पहुंच गया तो मैं रिसेप्शन पर बैठकर उनका इंतजार कर रहा था मैंने उन्हें फोन कर दिया था और वह मेरे पास आ गए कुछ देर बाद उनकी फैमिली भी आ गई और जब उनकी फैमिली आई तो उनकी लड़की को देखकर मैं तो उस पर पूरी तरीके से पिघल गया मैं उसे ही देखता रहा वह बहुत ज्यादा सुंदर थी उन्होंने मुझे अपने परिवार से मिलाया और कहा कि यह मेरा परिवार है मेरी नजरें तो आशा से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी और उसकी झील सी आंखों में जैसे मैं खो गया था।

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वीरेंद्र जी मुझे कहने लगे कि चलो आज तुम हमें कहां घुमाने वाले हो, होटल के बाहर ही गाड़ी खड़ी थी मैं उन्हें अपने साथ ले गया और उस दिन हमारा दिन बड़ा ही अच्छा रहा शाम के वक्त वह मुझे कहने लगे आज तो तुमने बड़े ही अच्छे से हमें जयपुर की सैर करवा दी मैंने उन्हें कहा हां सर क्यों नहीं लेकिन मेरी नजरें तो सिर्फ आशा की तरफ़ ही थी और अगले दिन भी मैं जब सुबह आशा को देख रहा था तो आशा भी मेरी तरफ ध्यान से देख रही थी और हम दोनों की नजरें एक दूसरे से मिलने लगे हम दोनों एक दूसरे से आंखों आंखों में बात करने लगे लेकिन मेरे पास आशा का नंबर नहीं था उस दिन मैंने आशा का नंबर ले लिया और जब मुझे आशा का नंबर मिल गया तो मैंने उसे फोन किया और उससे मैंने बात की आशा भी मेरे साथ बड़े अच्छे से बात कर रही थी और वह मुझसे मेरे बारे में पूछने लगी मेरे अंदर भी उसके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ने लगी और मैं आशा के बारे में पूछने लगा मुझे बहुत अच्छा लगा, जब मै आशा से बात करता हूं तो मेरे अंदर एक अलग ही फीलिंग आती है और मेरे दिल की धड़कन तेज हो जाती। उनके साथ करीब मैं 3 दिनों तक रहा और उसके बाद वह लोग वापस दिल्ली लौट गए जब वह दिल्ली लौटे तो मेरी आशा से उसके बाद बात होती रही लेकिन मैं अपने काम के चलते उससे मिलने नही जा पाया, आशा मुझे हमेशा कहती कि तुम मुझसे मिलने कब आओगे।

एक दिन मैंने फैसला कर लिया कि मैं आशा से मिलने दिल्ली जाऊंगा और मैं दिल्ली चला गया दिल्ली में मेरे मामा का लड़का रहता है मैं उस दिन उसके साथ ही रुका हुआ था वह मुझे कहने लगा तुम तो दिल्ली कभी आते ही नहीं हो आज अचानक से आ गए मैंने उसे सारी बात बताई वह मुझे कहने लगा तो तुम्हारे दिल का मामला है और तुम यहां लड़की से मिलने आए हो मैंने उसे कहा हां मैं लड़की से ही मिलने यहां आया हूं वह मुझे कहने लगा चलो तुमने यह अच्छा किया कि तुम उससे मिलने यहां आ गए नहीं तो शायद उसे कोई और पटा लेता मैंने उसे कहा तुम ऐसी बात क्यों कर रहे हो वह मुझे कहने लगा अरे यार तुम्हारे साथ मजाक कर रहा हूं। अगले ही दिन जब मैं आशा से मिला तो उससे मिलकर मैं बहुत खुश हुआ मैंने आशा से कहा मैं तुम्हें बहुत मिस कर रहा था इसलिए तुमसे मिलने के लिए आ गया आशा मुझे कहने लगी मैं भी तुम्हें बहुत मिस कर रही थी। आशा को मेरे बारे में सब कुछ पता था लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे दिल में आशा के लिए इतनी जगह है और मैं उसे इतना ज्यादा प्यार करता हूं मैं दिल्ली कुछ दिनों तक रुक गया और मैंने अपने मामा के लड़के को भी आशा से मिलवाया वह आशा से मिलकर बहुत खुश था और कहने लगा आशा बहुत ही अच्छी लड़की है तुम्हे ऐसी लड़की को छोड़ना नहीं चाहिए और उससे शादी कर लेनी चाहिए मैंने उसे कहा मैं उससे शादी करना चाहता हूं इस बात से मेरे मामा का लड़का खुश हो गया और कहने लगा तुम तो बहुत ही आगे निकल गए मैंने उसे कहा बस यह दिल का मामला है और अब हम दोनों एक दूसरे के साथ शादी कर ही लेंगे। मैं जब भी आशा को देखता तो उसे मुझे अपनी बाहों में लेने का मन करता है एक दिन आशा ने मुझे अपने गले लगा लिया और कहा रविंद्र मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी, रात को जब मैं तुम्हारे बारे में सोच रही थी तो मैं तुम्हें ही महसूस कर रही थी। मैंने आशा से कहा मैं भी तुम्हें बहुत मिस कर रहा था मैंने आशा से कहा आज मेरे मामा का लड़का कहीं गया हुआ है तुम मेरे साथ चलो वह मेरे साथ उसके रूम में चली आई। जब आशा मेरे साथ आई तो मैंने आशा को किस कर लिया उसके गुलाब जैसे होठों को मैं अपने होठों में लेकर बहुत खुश था और बहुत अच्छा भी लग रहा था।

मैंने उसके होठों को करीब 2 मिनट तक किस किया उसके होठों से किस करके खून भी निकाल दिया। मैंने उसके कपड़ों को खोलना शुरू किया और उसकी पिंक कलर की ब्रा को मैंने उतार कर एक किनारे रख दिया, उसके छोटे स्तनों को मैंने अपने मुंह में लेकर चूसा तो मुझे बहुत मजा आया। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो वह मेरा लंड को देखकर कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है। मैंने अपने लंड को आशा के मुंह में डाल दिया वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी उससे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैंने कोमल की चूत में उंगली लगा दी तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मैने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो उसे भी अच्छा महसूस होने लगा मैने उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो उसे अच्छा महसूस होने लगा मैं तेजी से उसे धक्के देने लगा। मेरे धक्के इतने तेज होती कि उसके मुंह से चीख निकल जाती और वह मेरा पूरा साथ देती उसकी योनि से मैंने खून भी निकाल कर रख दिया था क्योंकि उसकी योनि की सील मैंने ही तोड़ी थी।

जिस प्रकार से मैं उसे धक्के देता उसके मुंह से गर्म सांस निकल जाती। वह मुझे कहती मुझे तो आज मजा आ गया मैं उसके स्तनों को भी अपने हाथो से दबा रहा था और उसे तेजी से धक्के मार रहा था काफी देर तक तो मैंने ऐसा किया उसे भी बहुत अच्छा लगा, हम दोनों ने एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे से सेक्स किया। मैं बहुत ज्यादा खुश था आशा भी बहुत खुश थी उसके कुछ समय बाद आशा ने अपने पिता से मेरे बारे में बात की हालांकि वह बहुत गुस्सा हो गए लेकिन उसके बाद वह मान गए। उसके बाद मैंने भी अपने परिवार वालों को आशा के परिवार वालों से मिलाया और सब कुछ बहुत सही से हो रहा था। कुछ समय बाद ही हमारी शादी हो गई जब हम दोनों की शादी तय हो गई तो हम दोनों बहुत खुश थे अब हम दोनों पति पत्नी हैं और एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स की का मजा लेते हैं।

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