लंड गांड में ले लूं?


Hindi sex story, chut chudai ki kahani मैं गुजरात का रहने वाला एक सामान्य सा व्यक्ति हूं मेरा कद काठी और मेरा व्यक्तित्व बड़ा ही सामान्य सा है मैं हर किसी से बड़ी ही शालीनता से बात किया करता हूं। हमारे कॉलोनी में सब लोग मुझे बड़े सम्मान की दृष्टि से देखते हैं क्योंकि मैं जब भी किसी से मिलता हूं तो मैं उसे बड़ा ही आदर और सम्मान देता हूं। हम लोग जिस कॉलोनी में रहते हैं उस कॉलोनी में मेरे पापा ने काफी वर्ष पहले घर खरीदा था और हम लोग वहां पर काफी सालों से रहते हैं आ रहे हैं लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि हमारे पड़ोस में पटेल भाई अपना घर बेच देंगे। उन्होंने अपना घर बेच दिया था उन्हें शायद कुछ पैसों की जरूरत थी इसीलिए उन्होंने वह घर बेच दिया और जिन्होंने वह घर खरीदा वह आए दिन हमारे कॉलोनी में सबसे झगड़ा करते रहते। पहले तो मुझे लगा कि शायद उनकी पत्नी सविता का नेचर ही वैसा होगा लेकिन एक दिन जब गुप्ता जी ने भी हमारी कॉलोनी में हमारे पड़ोस में रहने वाले कल्पेश भाई के साथ झगड़ा किया तो मुझे उस दिन गुप्ता जी को देख कर भी काफी बुरा सा महसूस हुआ।

मैं गुप्ता जी की बड़ी इज्जत किया करता था लेकिन उन्होंने जब कल्पेश भाई के साथ उस दिन झगड़ा किया तो मेरी नजर में उनकी इज्जत पूरी तरीके से खत्म हो चुकी थी। मुझे उन्हें देखकर ऐसा नहीं लगता था लेकिन जब गुप्ता जी ने कल्पेश भाई के साथ उस दिन झगड़ा किया तो मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी क्योंकि कल्पेश भाई को कॉलोनी में सब लोग काफ़ी पसंद करते हैं उनकी अब तक शादी नहीं हुई है और वह बड़े ही सज्जन व्यक्ति हैं। वह किसी के साथ भी ज्यादा बात नहीं करते उन्हें यदि कोई काम होता तो ही वह बात किया करते थे लेकिन जब गुप्ता जी का उनके साथ झगड़ा हुआ तो मुझे भी इस बात का बहुत बुरा लगा। हम लोग भी उनसे काफी परेशान हो चुके थे क्योंकि आय दिन वह लोग आस पड़ोस में झगड़ा ही करते रहते थे जिससे कि हमारी सोसाइटी का माहौल पूरी तरीके से खराब होने लगा था। मैं अपनी पत्नी से कहा करता कि तुम उन लोगों से कम ही संपर्क मे रहा करो। मेरी पत्नी भी उनसे ज्यादा बात नहीं करती थी क्योंकि उसे मालूम था कि उनकी पत्नी सविता और गुप्ता जी का नेचर बिल्कुल भी ठीक नहीं है इसलिए वह उनसे ज्यादा बात नहीं किया करती थी। मैं गुप्ता जी से कम ही बात किया करता था लेकिन एक दिन उन्होंने मुझे रोकते हुए पूछा अरे मुकुल भाई साहब आप कहां जा रहे हैं मैंने उन्हें कहा मैं तो अपनी दुकान पर जा रहा था।

वह मुझे कहने लगे कि आप मुझे भी स्टेशन तक छोड़ देंगे मैंने उन्हें कहा आप कहां जा रहे हैं तो वह कहने लगे मैं दरअसल जयपुर जा रहा था यदि आप मुझे स्टेशन तक छोड़ दे तो आपकी मुझ पर बड़ी मेहरबानी होगी। मैंने कहा ठीक है मैं आपको छोड़ देता हूं मैंने उन्हें अपने स्कूटर पर बैठा लिया और उन्हें मैंने स्टेशन तक छोड़ा, स्टेशन तक उन्होंने मुझसे सारी कॉलनी वालों के लिए पता नहीं क्या क्या कह दिया। मैं सिर्फ सुने हीं जा रहा था मैंने उनकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि मुझे लगा उनकी बातों का जवाब देने का कोई अर्थ ही नहीं है इसलिए मैंने उनकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया। मैंने जब उन्हें स्टेशन छोड़ा तो उसके बाद मैं वहां से अपनी दुकान पर चला गया मैं जब दुकान पर पहुंचा दो मैंने देखा मेरी दुकान में कुछ लोग खड़े थे। मैंने अपने स्कूटर को एक किनारे किया और उनसे पूछा आप यहां पर क्यों खड़े हैं तो वह कहने लगे आपके यहां पर क्या राजू नाम का लड़का काम करता है मैंने उन्हें कहा हां मेरे यहां पर आ राजू काम करता है। वह कहने लगे हमें उनसे मिलना था मैंने कहा तो आप दुकान में देख लीजिए वह दुकान में ही होगा लेकिन वह दुकान के अंदर नहीं था। मैं जब अंदर गया तो राजू दुकान में नहीं था मैंने अपनी दुकान में काम करने वाले सुनील काका से पूछा राजू कहां है तो वह कहने लगे राजू तो आज सुबह से आया ही नहीं है। मैं जब बाहर गया तो मैंने उन लोगों से पूछा आपको क्या कोई काम था वह कहने लगे हां हमें राजू से काम था। मैंने पूछा क्या कुछ जरूरी काम था तो वह कहने लगे नहीं सर जरूरी काम तो नहीं था लेकिन हमें उससे मिलना था मैंने उनसे पूछा फिर भी आप मुझे बता दीजिए यदि जरूरी काम है तो मैं राजू से बात कर लूंगा।

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वह मुझे कहने लगे दरअसल राजू ने हमारे पैसे देने थे और उसने अभी तक हमारे पैसे नहीं लौटाए हैं तो यदि आप उससे हमारी बात करवा देते तो हम उससे एक बार बात कर लेते। मैंने उनसे कहा राजू ने आपसे किस चीज के लिए पैसे लिए थे तो वह कहने लगे उसने हमसे कहा था कि उसे कुछ काम के लिए पैसे चाहिए थे तो मैंने उसे पैसे दे दिए थे। वह सब लोग उनके रिश्तेदार थे जो कि उनके साथ आए हुए थे मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार माजरा क्या है लेकिन मुझे इतना तो पता चल चुका था कि राजू ने उन लोगों से पैसे लिए हैं। वह लोग वहां से चले गए मैंने उन्हें कहा था कि जब राजू आ जाएगा तो मैं उसे बता दूंगा लेकिन उसके दो-तीन दिन तक राजू आया ही नहीं। मैं बहुत ज्यादा परेशान था कि आखिरकार राजू ने ऐसा क्या किया है जो वह दुकान पर ही नहीं आ रहा। मैंने उसे फोन किया उसने मेरा फोन उठा लिया मैंने उसे कहा तुम आजकल दुकान पर क्यों नहीं आ रहे हो तो वह कहने लगा मुकुल भाई मेरी तबीयत आजकल ठीक नहीं है। मैंने उसे कहा तुम मुझे बता तो सकते हो कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तुम तो दुकान पर आ ही नहीं रहे हो ऐसे में काम कैसे चलेगा तुम्हें मुझे बताना तो चाहिए था। वह करीब एक हफ्ते तक दुकान में नहीं आया और जब वह दुकान पर आया तो मैंने उससे पूछा तुम्हारी तबीयत अब कैसी है वह मुझे कहने लगा मेरी तबियत तो अब ठीक है। मैंने उसे कहा देखो राजू तुम्हें कुछ छुपाने की जरूरत नहीं है तुम ने कोई गलती की है तो तुम्हें मुझे बताना होगा लेकिन उसने अपनी गलती मानने से पूरी तरीके से इंकार कर दिया।

मैंने उसे बताया दुकान में कुछ लोग आए थे और वह तुम्हें ढूंढ रहे थे यदि तुमने उनसे पैसे लिए हैं तो तुम एक बार उन लोगों से मिल तो सकते हो। उन्होंने मुझे बताया कि तुम ने उनसे पैसे लिए थे, मैं बड़ी ही शालीनता से उससे पूछ रहा था लेकिन वह कोई भी बात का जवाब नहीं दे रहा था। मैंने उसे कहा तुमने यदि उनसे पैसे लिए हैं तो तुम उन्हें पैसे लौटा दो उसने मुझे कहा मुकुल भाई वह पैसे तो खर्च हो चुके हैं इसीलिए तो मैं दुकान पर भी नहीं आ रहा था। मैंने राजू से कहा तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए लेकिन राजू ने तो मेरी दुकान से काम ही छोड़ दिया था। राजू ने ना जाने क्यों ऐसा किया लेकिन उसके बाद मेरा उससे कोई लेना-देना नहीं था। वह व्यक्ति फिर मेरे पास आए भी थे तो मैंने उन्हें साफ तौर पर मना कर दिया था कि राजू मेरे यहां पर काम नहीं करता है वह काफी दुखी थे और फिर वह वहां से चले गए। राजू मेरी दुकान से अब जा चुका था सुनील काका और मैं ही दुकान का सारा काम संभाला करते। मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ कि मैंने राजू को अपने साथ काम पर रखा मुझे नहीं मालूम था कि वह ऐसा भी कर सकता है लेकिन उससे ज्यादा तो मैं तब चौंक गया जब सविता भाभी के बारे में मुझे मालूम पड़ा सविता भाभी के संबंध ना जाने किन किन लोगों से थे।

गुप्ता जी कहीं बाहर गए हुए थे इसी का फायदा उन्होंने बड़े ही अच्छे से लिया वह घर पर ना जाने किस-किस को बुलाती रहती। एक दिन मैंने यह सब देख लिया उन्होंने मुझे कहा भाई साहब मुझे आपसे कुछ बात करनी थी मैं सोचने लगा भाभी मुझसे क्या बात करना चाहती होंगी। उन्होंने मुझसे कहा आइए मैं आपको चाय पिलाती हूं वह मुझे घर के अंदर ले गई और मेरे बगल में बैठ गई। वह मुझे कहने लगी आप तो बड़े अच्छे हैं आपकी तो सारी सोसाइटी में सब लोग बड़ी तारीफ करते हैं। वह मेरे लंड को अपने हाथ से दबाने लगी, मेरे लंड को जब उन्होने बाहर निकाला तो उस उन्होने अपने मुंह में ले लिया। मैं चुपचाप बैठा हुआ था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती तो उन्हें बड़ा मजा आता और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। उन्होंने मेरे सामने अपने बदन से सारे कपड़े उतार दिया और मुझे कहा मैं कैसी दिखती हूं। मैंने उन्हें कहा अरे आपका बदन तो बड़ा ही लाजवाब है उन्होंने अपनी चूत को मेरे लंड से सटाया और कुछ देर तक वह अपनी चूत को मेरे लंड से सहलाती रही।

अब वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करने लगी मेरा लंड उनकी योनि के अंदर तक जा चुका था वह बड़े अच्छे तरीके से अपनी बड़ी चूतडो को ऊपर नीचे करती जब उनकी इच्छा भर गई तो मैंने अपने लंड को उनकी गांड के अंदर डाल दिया। उनके मुंह से बड़ी तेज चीख निकली और वह कहने लगी आपने यह बड़ी ही मजेदार बात की अपने मेरी गांड में अपने लंड को डाला गुप्ता जी तो मेरी तरफ देखते ही नहीं है। मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया और बड़ी तेजी से उन्हे धक्के मारने लगा मैं बड़ी तेजी से धक्के दिए जाता जिससे कि उनका बदन पूरी तरीके से हिल जाता उनकी चूतड़ों का रंग लाल होने लगा। उनको पूरा मजा आने लगा था वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाए जा रही थी और मैं उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था। मैंने उनकी चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेजी से उनकी गांड के अंदर अपने लंड को अंदर बाहर करता जाता जिससे कि मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था। मैंने जब उनकी गांड की तरफ देखा तो उनकी गांड से खून आने लगा था वह मेरा साथ बड़े अच्छे तरीके से दे रही थी। मैंने उनकी चूत और गांड के मजे काफी देर तक लिए और हम दोनो की इच्छा पूरी हो गई।

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