मेरे सुर्ख खड़े लाल लंड पर नाम है तेरा


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Hindi sex story, kamukta नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम तेजस है और मैं अँधेरी मुंबई में रहता हूँ | मेरी उम्र 26 साल है और मैं फिलहाल एक कंपनी में प्राइवेट जॉब करता हूँ | मैं दिखने में सांवला हूँ और मेरी कदकाठी भी अच्छी है | मेरा शारीर फिट है और मेरी हाईट 5 फुट 11 इंच है | दोस्तों आज जो मैं आप लोगो के सामने अपनी कहानी लिखने जा रहा हूँ ये मेरी पहली कहानी और एक दम सच्ची घटना है | मैं आशा करता हूँ कि आप सभी को मेरी ये कहानी जरुर पसंद आएगी | तो अब मैं आप लोगो का ज्यादा समय नहीं लेते हुए अपनी कहानी शुरू करता हूँ | ये घटना तब की है जब मैं नया नया इस जॉब में आया था और मेरे यहाँ पर कोई दोस्त भी नहीं थे | मैं बस वहां अपने काम से काम रखता था | धीरे धीरे मेरे काम को सराहा गया क्यूंकि मैं अपना सारा काम पूरी इमेंदारी और सही तरीके से करता था | मेरे ऑफिस में कई लड़कियां भी काम करती थी जिनमे से एक का नाम मनीषा जोशी था | वो बहुत ही सुन्दर लड़की थी और मेरे ख्याल से उसकी उम्र 24 साल होगी | वो दिखने में बहुत गोरी थी और उसका फिगर भी बहुत सेक्सी था | मेरा बहुत मन होता था कि मैं उससे जान पहचान बढ़ाऊ लेकिन मेरा केबिन अलग था और वहां पर मैं अकेला ही था | ज्सोको जब फाइल मेरे पास चेक करना होता था तभी वो मेरे पास आया करते थे वरना सभी अपने अपने काम करते रहते और आपस में ही बात करते थे | मैं बस मोबाइल में ही अपना टाइमपास किया करता था | एक दिन मेरा काम कुछ ज्यादा बढ़ गया था और मनीषा एक दिन की छुट्टी पर थी तो उसे भी बचा हुआ काम करना था |

जब तक वो मेरे पास काम कम्पलीट करके फाइल नहीं दे देती तब तक मुझे भी वहां ही रुकना था | हमारे जो मेनेजर थे वो बहुत ही खडूस थे और बहुत ही मुश्किल से किसी को छुट्टी दिया करते थे और वो भी तब जब लोगो को बहुत ज्यादा जरुरत हो छुट्टी की तभी वरना नहीं | वो काम के प्रति भी बहुत कठिन किस्म के आदमी थे | उनको रोज का काम रोज ही चाहिए होता था और एक दिन भी कोई नहीं आता था तो उसे दो दिन का काम कम्पलीट करके देना पड़ता था वरना वो सैलरी बहुत ज्यादा ही काट लेते थे | मैं बैठे बैठे वहां पर मनीषा के बारे में ही सोच रहा था कि ये कितनी सुन्दर है और जब ये बिना कपड़ो के होगी तो कितना मजा आयगा इसे चोदने में | मैं ऐसे ही सोच रहा था कि तभी मनीषा मेरे केबिन के अन्दर आई मुझसे कहा सर सिये आपसे मुझे कुछ कहना है |

मैंने कहा हाँ बोलो क्या कहना है ? तो उसने कहा कि उसे कहीं जाना है और बहुत ही जरुरी काम है इसलिए वो अगले दिन आ कर अपना काम करेगी | मैंने उससे कहा कि यार तुमारी वजह से मुझे भी अभी तक रुकना पड़ा और फिर तुम ने काम भी पूरा नहीं किया तो मैंने मेनेजर से क्या कहूँगा | तो उसने कहा सर आप आज बस थोडा संभल लीजिये | मैं कल सुबह जल्दी आ कर काम कर लूंगी | मैंने कहा ठीक है मैं देखता हु क्या कर सकता हूँ | इतना कहा ही था मैंने कि वो जल्दी से अपना बैग उठाई और चलती बनी | मैं मेनेजर के पास गया और उन्हें फाइल दिया | उन्होंने कहा तेजस आज मैं बहुत ज्यादा थक गया हूँ तो कल सुबह देख लूँगा | तुम भी जाओ मैं भी थोड़ी देर से घर निकल जाऊँगा | रात के कुछ 8 बज रहे होंगे | मैं नीचे पार्किंग में गया और अपनी बाइक जैसे ही ओं किया तो सामने मेरी नजर मनीषा पर पड़ी | मनीषा एक लड़के के साथ चिपकी हुई थी और दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे | ये देख कर मेरा बहुत दिमाग ख़राब हुआ कि मैंने अपनी रिस्क में उसके काम को संभाला और वो यहाँ चूत चुदान फैला रही है | वो दोनों की भी मुझे देख कर बोलती बंद हो गई | वो दोनों अलग हुए | पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा तो मैं अपनी बाइक स्टार्ट करके चल दिया | गुस्सा मुझे बहुत आ रहा था क्यूंकि अगर मेनेजर मुझसे पहले वहां पंहुच गया तो डांट मुझे ही पड़ेगी |

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रात को भी वही सब मेरी आँखों के सामने आ रहा था बार बार | यही सोचते सोचते मेरी नींद भी लग गई | मैं रोज सुबह जल्दी उठता हूँ तो सबसे पहले मैं ही ऑफिस पंहुचता हूँ | मैंने ऑफिस पंहुच कर सबसे पहले मनीषा की फाइल निकला और उसे कम्पलीट करने बैठ गया | एक घंटे में काम भी पूरा हो गया | फिर मैंने  वैसे ही फाइल जमा के अपने केबिन में बैठ गया | मनीषा उस दिन जल्दी आई और मुझसे नजरे नहीं मिला पा रही थी | वो मुझसे कहना चाह रही थी पर कुछ कह नहीं पा रही थी |, मैं समझ गया था तो मैंने उससे कहा कि मैंने सुबह जल्दी आ कर तुम्हारी फाइल कम्पलीट कर दिया हूँ टेंशन मत लो | ये बात सुन कर वो खुश हो गई और बदले मुझे थैंक यू कहा | मैंने भी उसका थैंक यू एक्सेप्ट किया और अपने काम में लग गया | बाद में सभी लोग आने लगे और और अपना अपना काम सँभालने लगे |  ऐसे ही कुछ दिन बीत गए थे |  बारिश के दिन चालू हो चुके थे और एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था | बारिश हो रही थी और मैं अपना रेनकोट नहीं लाया था | मुझे बहुत ख़राब लग रहा था कि आज मुझसे भीगते हुए घर जाना पड़ेगा | खैर मैं अपना काम ख़त्म करके पार्किंग पर गया तो मुझे किसी की दबी आवाज़ आई | मुझे समझते देर न लगी कि ये मनीषा हो सकती है | मैंने ध्यान नहीं दिया | तभी मुझे फिर से चिल्लाने की आवाज़ आई |

मुझे लगा कुछ तो गड़बड़ है क्यूंकि ये चुदाई वाली आवाज़ नहीं लग रही थी | मैं अपनी गाडी से उतरा और फिर उसी आवाज़ की तरफ बढ़ने लगा | जब मैंने मोबाइल टौर्च मार कर देखा उस तरफ तो मनीषा ऊपर से पूरी नंगी और और पेंट पहने थी और एक लड़का उसके दूध चूस रहा था और दूसरा लड़का दूध दबा रहा था और उसके मुंह पर हाँथ रखे हुए था | उन लोगों ने मुझे देख कर वहां से चले जाने को कहा तो मैं भी डर गया और वहां से जाने का सोचा ही था कि सामने मुझे एक मोटा लट्ठ दिखाई पड़ा | मैंने सोचा कि यार भागने से अच्छा है कि इसकी इज्जत को लुटने से बचा लूं | मैंने वो डंडा उठाया और उनकी तरफ बढ़ते हुए दोनों के सिर पर एक एक डंडे मार कर उनको बेहोश कर दिया | मैंने उसे जल्दी वहां से चलने को कहा तो उसने कहा कि यार मेरे कपडे फटे हुए हैं और इस हालत में मैं कैसे बाहर जाऊं | मैंने उसे अपना ब्लेज़र दिया और कहा इसे पहनो और चलो | तब तक रात के 11 बज चुके थे और मेरे घरवाले भी शादी में बाहर गए हुए थे | मैंने उसे पूछा कि तुम्हारा घर कहाँ हैं ? तो उसने कहा कि वहां से बहुत दूर रहती है और लोकल से आया जाया करती है | पर इतनी रात में मैं घर भी नहीं जा सकती नहीं तो घरवाले शक करेंगे |

मैंने कहा तुमाहरी इज्ज़त पर आ गई अगर वो डंडा नहीं मिलता तो इज्ज़त बाख नहीं पाती फिर भी शक करेंगे घरवाले | उसने कहा यार तुम नहीं जानते मेरे घरवालों के बारे में | मैंने कहा कुछ बताओगी तो जान पाउँगा ना | उसने कहा हाँ बात तो तुमाहरी भी सही है | फिर उसने कहा वो घरवाले मेरे सगे नहीं हैं वो सौतेले हैं और चाहते ही हैं कि मुझे कुछ हो जाए और पूरी जायदाद उनके नाम हो जाए | मैंने कहा अच्छा तो ये माजरा है | उसने कहा हाँ इसलिए मुझे आज रात कही और काटनी पड़ेगी | मैंने कहा कहीं नहीं काटनी पड़ेगी तुम मेरे पास रहोगी वरना ना जाने क्या हो जाएगा | उसने कहा पर तुमाहरे घर में तो सब होंगे न यार | मैंने कहा नहीं सब शादी में गए हैं और कल दोपहर तक आयेंगे | उसने कहा ठीक है अगर तुम्हे कोई दिक्कत नहीं है तो मैं रुक जाती हूँ | मैंने कहा ठीक है चलो और हम लोग घर पहुँच गए | घर जाने के बाद मैं खाना लेने गया और उससे कहा बाथरूम सामने वाले रूम में है तुम फ्रेश हो जाओ | वो चली गयी और मैं भी कपडे बदल के खाना निकालने लगा |

करीब बीस मिनट हो गए वो बहार नहीं आई तो मैंने सोचा जाके देखूं क्या हो गया इसको | मैं जैसे ही रूम में गया तो मनीषा टॉवल पहन के यहाँ वहां देख रही थी | मैं उसको उसकी हालत में देखके जोश में आ गया और उसका ध्यान मेरी तरफ नहीं था | मेरा लंड मेरी हाफ पेंट से साफ़ नज़र आने लगा था | फिर वो आगे बढ़ी तो उसका टॉवल खुल गया और वो पूरी नंगी हो गयी | मेरा लंड और खड़ा हो गया | वो जैसे ही मुड़ी टॉवल उठाने के लिए उसकी नज़र मुझपर पड़ी और मेरे खड़े लंड पर पड़ी | उसने कहा ये क्या है तुम भी उन लडको जैसे हो | मैंने कहा नहीं ये तो हो ही जाता है सॉरी | मन उसके पास गया और उसको टॉवल उठा के दिया और कहा ये लो पहन लो | पर मुझे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने उसको अपने पास खींचा और कहा सुनो तुम बिना कपड़ों के ज्यादा सेक्सी लगती हो | उसने कहा तो क्या इरादा है | मैंने उसको वह बिस्तर पर गिरा दिया और नंगा होकर उसके ऊपर लेट गया और कहा बस यही इरादा है | उसके पूरे बदन पर मैं अपना स्पर्श देने लगा और उसके गुलाबी निप्पल्स को चूसते हुए उसके दूध दबाने लगा | वो भी मुझे प्यार से सहलाने लगी और उसके बाद मैं उसकी चूत की तरफ बढ़ा तो वहां बाल थे इसलिए मैंने उसकी चूत को नहीं चाटा | पर उसकी चूत गीली हो चुकी थी इसलिए मैंने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और एक झटके में पूरा अन्दर कर दिया | वो कसमसा गयीपर आवाज़ नहीं की और आराम से मेरे लंड के झटके झेलती गयी | कुछ देर बाद मेरी चुदाई में रफ़्तार बढ़ी और उसकी चूत की गर्मी के कारण मेरा मुट्ठ उसकी चूत में ही भर गया | उस रात मैंने उसे बहुत चोदा |

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