साथ में पढ़ाने वाले टीचर ने मेरी गर्मी को शांत किया


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मेरा नाम सुजाता है मैं बनारस की रहने वाली हूं, मैं बनारस के ही इंटर कॉलेज में पढाती हूं और मेरे पति भी मेरे साथ में ही पढ़ाते हैं। हम लोगों की शादी को अभी एक वर्ष ही हुआ है, यह रिश्ता मेरे पिताजी ने ही करवाया था, मेरे पिताजी इस रिश्ते से बहुत खुश हैं क्योंकि वह चाहते थे कि मेरी शादी अजय के साथ हो जाए। अजय हमारे मोहल्ले में ही रहते थे इसी वजह से मेरे पिताजी उन्हें अच्छे से जानते थे और उनके परिवार वालों को भी वह बहुत ही अच्छे से पहचानते थे। जब मेरे पिताजी ने अजय के घरवालों से हमारे रिश्ते की बात की तो उनके घर वाले भी हमारे रिश्ते के लिए मना नहीं कर पाए। जिस स्कूल में मैं पढ़ाती थी उसी स्कूल में अजय भी पढ़ाते थे। हम दोनों के बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी और मेरे पिताजी चाहते थे कि हम दोनों की यह दोस्ती रिश्ते में बदल जाए। जब उन्होंने अजय के घरवालों से बात की तो उन्होंने भी तुरंत हां कर दिया, और हम दोनों की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई।

मेरी शादी को एक वर्ष हो चुका है, हम दोनों के बीच में इन एक वर्षों में कभी भी झगड़ा नहीं हुआ और ना ही कभी भी अजय ने मुझसे ऊंची आवाज में बात की। मैं अजय को स्कूल के समय से ही पहचानती हूं। जबसे मैंने स्कूल में पढ़ाना शुरू किया है उस वक्त ही अजय और मेरी मुलाकात हुई थी। अजय और मै एक ही स्कूल में है इसलिए मुझे उनका व्यवहार अच्छे से पता है। अब हम दोनों ही सुबह साथ में स्कूल जाते थे और शाम को साथ में ही स्कूल से लौटा करते थे। मैं अपने रिश्ते से बहुत ही खुश हूं, मैं जिस स्कूल में पढ़ा रही थी वहां पर मुझे 4 वर्ष हो चुके थे लेकिन मेरा ट्रांसफर लखनऊ हो गया है, मैं अपने ट्रांसफर से बहुत ही दुखी थी और मैं सोचने लगी कि अब मुझे अकेले रहना पड़ेगा लेकिन मैं अपनी नौकरी नहीं छोड़ सकती थी, अजय भी कहीं ना कहीं बहुत ज्यादा दुखी थे और जब मेरा ट्रांसफर लखनऊ हो गया तो उसके बाद वह मेरे साथ लखनऊ आए और उन्होंने ही सारा घर का सामान रखवाया। मैंने जिस जगह पर घर लिया हुआ था वहां से कुछ ही दूरी पर स्कूल है ताकि मैं समय पर पहुंच सकूं क्योंकि बनारस में तो अजय और मैं साथ में ही जाते थे, हम दोनों अपनी कार से ही जाते थे इसलिए हम दोनों समय पर स्कूल पहुंच पाते थे लेकिन यहां पर मुझे कन्वेंस की प्रॉब्लम थी इसलिए मैंने स्कूल के सामने ही घर लेने के बारे में सोचा।

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जब मैंने वहां पर अपना पूरा सामान सेट करवा दिया उसके बाद हम लोग कुछ समय के लिए बनारस चले गए, मैंने स्कूल से कुछ समय के लिए छुट्टी ली हुई थी। मैंने अजय से कहा कि हम लोग कहीं घूमने चलते हैं और पापा मम्मी भी हमारे साथ घूमने के लिए चलेंगे क्योंकि मुझे यह बात अच्छे से पता थी कि जब मैं लखनऊ में काम शुरू कर दूंगी तो हम दोनों को एक साथ घूमने का समय बहुत कम मिलेगा इसलिए मैं अपनी छुट्टी को अपने घर वालों के साथ बिताना चाहती थी। अजय ने मुझे कहा कि हम तुम्हारे घर वालों को भी बोल देते हैं और वह लोग भी हमारे साथ चल पड़ेंगे। मेरे माता-पिता भी तैयार हो गए और हम लोग घूमने के लिए नैनीताल चले गए। हम लोगों ने नैनीताल में साथ में काफी समय बिताया और मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब हम लोग नैनीताल में साथ थे। अजय भी बहुत खुश थे और मेरे माता-पिता भी बहुत खुश थे। अजय के पिता जी कहने लगे की सुजाता ने यह बहुत ही अच्छा फैसला लिया कि हम लोग घूमने के लिए आ गए, नहीं तो हमें भी कहां समय मिल पाता है। हम लोग नैनीताल में 5 दिन रूके और उसके बाद हम लोग वापस बनारस लौट आए। बनारस में जितने भी दिन मैं घर पर थी, मैं यही सोचती थी कि मैं अजय के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिता पाऊं, उसके कुछ दिन बाद मैं लखनऊ चली गई। जब मैं लखनऊ गयी तो मुझे बहुत ही बुरा लगा क्योंकि मैं आज तक कभी भी अकेले नहीं रही हूं लेकिन मुझे अब अकेले ही रहना था। मुझे अकेले बहुत ही डर लगता है इसलिए मैं अजय को फोन कर दिया करती थी लेकिन धीरे-धीरे मुझे आदत पड़ने लगी थी और कुछ समय बाद मैंने भी अपने आप को उस माहौल में ढाल लिया था। मैं सुबह स्कूल चली जाती और शाम को घर लौट आती।

मेरे ज्यादा परिचित नहीं थे, इस वजह से मैं अपने घर पर ही रहती थी और जब मैं घर पर आ जाती तो उसके बाद मैं कुछ देर टीवी देख लिया करती थी और अभी मैं कुछ किताब पढ़ लेती थी क्योंकि मुझे नोबल्स पढ़ने का बहुत शौक है। स्कूल में भी मेरी दोस्ती होने लगी थी और मेरी स्कूल में काजल मैडम है, उनसे मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी। वह मुझे कहने लगे कि तुम अकेले कैसे एडजस्ट कर लेती हो, मैंने उन्हें कहा कि आप मुझे आदत हो गई है और इस वजह से मैं अकेली एडजस्ट कर पाती हूं। काजल मैडम की शादी को भी काफी वर्ष हो चुके हैं और वह मुझसे सीनियर हैं परंतु वह मुझसे बहुत ही अच्छे से रहती हैं। कभी-कभार वह मेरे घर पर भी आ जाती हैं और जब वह मेरे घर पर आती हैं तो मुझे उस दिन बहुत अच्छा लगता है क्योंकि मैं घर पर अकेली होती हूं और जब वह मेरे घर पर आती हैं तो हम कुछ देर साथ बैठकर बात कर लेते हैं। हमारे स्कूल में और भी टीचर हैं लेकिन मेरा उनके साथ ज्यादा संपर्क नहीं रहता, काजल मैडम के ही रिश्ते में एक भाई है वह भी हमारे स्कूल में पढ़ाते हैं, उनका नाम रविंद्र है। मेरी उनसे कभी कभार बात हो जाती है और हम लोग लंच टाइम में साथ में बैठ जाया करते हैं। उनका नेचर भी बहुत अच्छा है और वह बहुत ही सामाजिक व्यक्ति हैं। मुझे उनसे बात करते हुए भी बहुत अच्छा लगता है और वह भी मुझसे बात करना पसंद करते हैं।

जब उन्हें मेरे बारे में पता चला कि मेरे पति भी एक अध्यापक हैं और वह बनारस में पढ़ाते हैं तो वह कहने लगे कि आप अकेले कैसे रह लेती हैं, मैं रविंद्र जी से कहने लगी कि मुझे अब आदत हो गई है इसलिए मैं अकेली रह लेती हूं। हम लोगों को जब भी समय मिलता तो हम लोग बैठ कर बातें कर लिया करते हैं। जिस जगह पर मैंने घर लिया हुआ था वहां से कुछ ही दूरी पर रविंद्र सर का भी घर है और काजल मैडम भी उसी रास्ते से होकर जाती थी इसीलिए हम तीनों जब भी स्कूल से लौटते तो साथ में ही आते थे। हम लोग स्कूल से पैदल ही आते थे और रास्ते में बात करते करते हम लोग आते थे। काजल मैडम भी मुझे कहते थे कि कभी तुम्हें अकेला महसूस हो तो तुम मेरे घर पर आ जाया करो इसलिए जब भी मुझे अकेलापन महसूस होता था तो मैं उनके घर पर चली जाती थी और मुझे बहुत अच्छा लगता था जब मैं उनके घर पर जाती थी। उनकी एक छोटी लड़की है वह बहुत ही प्यारी है, वह मुझे बहुत अच्छी लगती है, मैं जब भी उनके घर पर जाती हूं तो मैं उसके लिए कुछ ना कुछ गिफ्ट लेकर जरूर जाती हूं और मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब मैं काजल मैडम के घर पर जाती हूं। हम लोग जब भी स्कूल से लौटते हैं तो उस वक्त मैं कई बार रविंद्र जी और काजल जी को भी अपने घर पर आने के लिए कहती हूं लेकिन वह लोग नहीं आते परंतु मैंने उनसे एक दिन कहा कि आप मेरे घर पर चलिए और वह लोग मेरे घर पर आ गए। जब वह घर पर आए तो कहने लगे की अपने घर तो बहुत ही साफ सुथरा रखा हुआ है, आप अकेले इतना सारा काम कैसे मैनेज कर लेती हैं, मैं उन्हें कहने लगी कि मुझे साफ सफाई का बहुत शौक है और मुझे अपने घर को सजाकर रखना बहुत अच्छा लगता है। हम तीनों ही आपस में बैठकर बात कर रहे थे। काजल मैडम कहने लगी कि मुझे घर जाना पड़ेगा आप लोग बैठ कर बातें करो वह जल्दी में घर चली गई और रविंद्र जी मेरे साथ बैठे हुए थे। हम दोनों आपस में बात कर रहे थे मुझे उनसे बात करना बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं भी अकेला ही रहती हूं।

रविंद्र जी के लिए मैंने चाय बनाई और हम दोनों साथ में बैठ कर चाय पी रहे थे। मैंने जब उनकी छाती के बाल देखे तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा मैंने कई दिनों से सेक्स नहीं किया था। मैं उनके पास जाकर बैठ गई और अपनी गांड को उनसे टच करने लगी। वह भी मेरे इशारों को समझ चुके थे और उन्होंने चाय का कप साइड में रखते हुए मेरी गांड को दबाना शुरू कर दिया। उन्होंने मेरे स्तनों को जैसे ही दबाया तो मैं पूरे मजे में आ गई और अपने होठों को मैंने रविंद्र जी के होठों पर लगा दिया। हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे से किस कर रहे थे और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उन्होंने जब मेरे कपड़े खोले तो वह कहने लगे कि आपका शरीर बहुत ही ज्यादा मस्त है। मैंने भी उनके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और काफी देर तक मैं उनके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती रही। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उनके लंड को मुंह में ले रही थी। मैंने उन्हें कहा कि अब आप अपने लंड को मेरी चूत मे डाल दीजिए। उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत मे डाला तो मुझे बहुत अच्छा लगा। वह मुझे बड़ी तेज धक्के मार रहे थे और उनकी झाटों के बाल मेरी मुलायम योनि में टच हो रहे थे जिससे कि मेरी और भी उत्तेजना बढ़ रही थी। उन्होंने मेरे दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेज गति से धक्के देने लगे। मैंने भी अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया वह अपने लंड को मेरी चूत के पूरे अंदर तक डाल रहे थे मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। उन्होंने काफी देर तक मुझे ऐसे ही झटके मारे लेकिन ज्यादा समय तक वह मेरी चूत की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनका वीर्य पतन मेरी चूत में ही हो गया। जैसे ही उनका वीर्य मेरी चूत में गिरा तो मुझे बहुत खुशी हुई और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा।

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