स्कूल के प्रिंसिपल का लड़का


antarvasna

मेरा नाम रीमा है मैं जोधपुर की रहने वाली हूं, मेरे पिताजी स्कूल में अध्यापक हैं और वह एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हैं। मेरी उम्र भी 28 वर्ष की हो चुकी है और मैं भी स्कूल में पढ़ाती हूं। मेरे पिताजी कुछ समय बाद ही रिटायर होने वाले हैं। मेरा छोटा भाई कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है और वह बहुत ही शरारती है, उसकी हमेशा ही कुछ ना कुछ शिकायतें घर पर आती रहती हैं, जिस वजह से मेरे पिताजी बहुत परेशान रहते हैं क्योंकि मेरे पिताजी की सभी लोग बहुत इज्जत करते हैं, आज तक उनके बारे में किसी ने भी कभी कोई गलत शब्द नहीं कहे और ना ही कभी भी उन्होने किसी के साथ गलत बात की।  मेरे पिताजी मेरे भाई की वजह से बहुत दुखी रहते हैं और वह मेरे भाई को बहुत समझाते हैं परंतु वह बिल्कुल भी समझता नहीं है और ना ही वह उनकी कुछ बात सुनता है।

उसके साथ के जितने भी लड़के हैं वह सब बहुत ही शरारती हैं इसी वजह से वह भी उनके साथ बिगड़ गया है। एक बार उन्होंने किसी के साथ बहुत ज्यादा बदतमीजी कर दी थी और इस कारण उस दिन मेरे पिताजी को पुलिस स्टेशन जाना पड़ा और फिर मेरे भाई को उन्होंने पुलिस स्टेशन से छुड़ाया। तब से वह मेरे छोटे भाई को देखकर बहुत ही नफरत करते हैं और वह उससे बिल्कुल भी बात करना पसंद नहीं करते। मेरी मां भी बहुत परेशान रहती है जिस प्रकार से मेरे भाई का आचरण है। वह हर जगह मेरे माता-पिता की बेज्जती करवाता है। मैं भी उससे बहुत कम बात करती हूं। मैं जिस स्कूल में पढ़ाती हूं वो एक सरकारी स्कूल है और मैंने अपनी पहली जाइनिंग भी इसी स्कूल में की थी और तब से मैं यहीं पर पड़ा रही हूं। मुझे इस स्कूल में पढ़ाते हुए 3 वर्ष हो चुके हैं, मैं जिस स्कूल में पढ़ाती हूं वह इंटर कॉलेज तक है और हमारे स्कूल में जितने भी बच्चे हैं वह सब बहुत शरारती हैं लेकिन सब लोग मुझसे बहुत डरते हैं क्योंकि मैं सब बच्चों को बहुत डरा कर रखती हूं यदि कोई गलत करता है तो मैं उसे बहुत ही बुरी तरीके से डांटती हूं इसीलिए मेरी क्लास में कोई भी बच्चा बदतमीजी नहीं करता।

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हमारे स्कूल के प्रिंसिपल बहुत ही अच्छे हैं, उनका नाम शर्मा जी है। शर्मा जी नेचर में तो बहुत अच्छा हैं लेकिन वह बहुत ज्यादा आलसी हैं यदि उन्हें कुछ काम के लिए कहा जाता है तो वह उस बात को टाल देते हैं और कहते हैं कि वो काम हम लोग कल कर लेंगे इसीलिए सब लोग उनके पास बहुत ही सोच समझ कर जाते हैं यदि किसी को भी उनसे कुछ काम होता है तो यह संभव नहीं है कि वह काम उसी दिन होगा, यदि आज उन्हें किसी काम के लिए बोला जाए तो वह 10 दिन बाद वह काम करते हैं लेकिन वह मुझे बहुत ही अच्छा मानते हैं और मेरा काम तुरंत कर देते हैं क्योंकि मैं बच्चों को बहुत ही अच्छे से पढ़ाती हूं। मैं अपने पढ़ाई के मामले में बहुत ही सीरियस रहती हूं। एक दिन शर्मा जी मुझे कहने लगे कि मैंने अपने लड़के के लिए जन्मदिन की घर पर ही पार्टी रखी है यदि आप हमारे घर आए तो मुझे बहुत ही खुशी होगी, जब शर्मा जी ने मुझे उस दिन अपने घर पर आने के लिए कहा तो मुझे बहुत अच्छा लगा,  वह बहुत ही कम टीचरों को अपने घर पर बुलाते हैं। मैंने उन्हें कहा कि मैं जरूर आपके घर पर आऊंगी। मुझे उनका घर नहीं पता था इसलिए मैंने उनसे एड्रेस ले लिया और तब मैं उनके घर चली गई लेकिन जब मैं उनके घर गयी गयी तो मुझे उनका घर नहीं मिल रहा था इस वजह से मैंने शर्मा जी को फोन कर दिया और शर्मा जी ने अपने लड़के को भेज दिया। मैंने जब उसे फोन पर समझा है कि मैं कहां पर खड़ी हूं तो वह मुझे लेने आ गया। जब मैं उसे मिली तो मैंने उससे कहा कि क्या आपका ही बर्थडे है, वह कहने लगा हां मेरा ही बर्थडे है। मैंने उसे कहा कि मेरी वजह से आपको तकलीफ हुई है वह कहने लगा इसमें तकलीफ की कोई बात नहीं है। मुझे उसका व्यवहार बहुत ही अच्छा लगा। अब मैं उसके साथ उसकी गाड़ी में बैठ गई और हम लोग रास्ते में बात करते हुए जा रहे थे। मैंने उससे उसका नाम पूछा, उसका नाम गौतम है। मैंने गौतम से पूछा कि आप क्या कर रहे हैं, वह कहने लगा कि मैं अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूं। गौतम के बात करने के तरीके से वह बहुत ही अच्छा लग रहा था।

अब हम लोग घर पहुंच चुके थे। जब हम लोग घर पहुंचे तो शर्मा जी बहुत ही खुश हुए और उन्होंने मुझे अपनी फैमिली से इंट्रोड्यूस करवाया। जब उन्होंने मुझे अपनी फैमिली से मिलाया तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा क्योंकि उनके परिवार में सब लोग बहुत अच्छे हैं और मेरी मुलाकात गौतम से पहले ही हो चुकी थी इसलिए उससे भी मेरा परिचय हो चुका था। मैंने गौतम को बर्थडे गिफ्ट दिया, वह बहुत खुश हुआ। हमारे स्कूल के कुछ टीचर आए हुए थे, मैं भी उनके साथ ही बैठ गई और उनके साथ ही बात कर रही थी। मुझे काफी अच्छा लग रहा था जब उनके परिवार वाले सब आपस में फोटो खिंचवा रहे थे और कुछ फोटो  उन्होंने हमारे साथ भी लिए। जब पार्टी खत्म होने वाली थी तो मैंने शर्मा जी से कहा कि अब मैं चलती हूं तो वह कहने लगे कि आपने कुछ खाया या नहीं, मैंने कहा कि मैंने खा लिया है मुझे घर जाने के लिए लेट हो रही है इसलिए मैं अभी घर चलती हूं। मैं गौतम से भी मिली, गौतम से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा और उसके बाद मैं अपने घर चली गई। उसके कई समय तक मेरी मुलाकात गौतम से नहीं हुई लेकिन एक दिन वह हमारे स्कूल में आया हुआ था और वह स्कूल में था तो मुझे बहुत अच्छा लगा। जब मैंने गौतम को देखा तो गौतम ने उस दिन चश्में पहने हुए थे और वह बहुत ही अच्छा लग रहा था।

मैं गौतम से मिली तो मैंने उसे कहा, आज तुम बहुत अच्छे लग रहे हो उसने मुझे धन्यवाद कहा और उसके बाद वह मेरे साथ काफी देर तक बात कर रहा था। गौतम और मेरी मुलाकात दूसरी बार थी लेकिन मुझे बिल्कुल भी नहीं लगा कि हम दोनों दूसरी बार मिल रहे हैं, हम दोनों के बीच दोस्ताना संबंध बन चुके थे और गौतम जब भी मुझे मिलता तो वह मुझसे मिलकर बहुत खुश होता था और मैं भी गौतम से मिलकर बहुत खुश होती थी। एक दिन गौतम ने मुझे फोन कर दिया और जब उसने मुझे फोन किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा, मैं भी उससे बात करने लगी और मैं बहुत खुश हो रही थी जब मैं गौतम से बात कर रही थी। मुझे नहीं पता था कि हम दोनों के बीच में इतनी अच्छी दोस्ती हो जाएगी कि हम दोनों एक दूसरे के बिना बात किये हुए बिल्कुल भी नहीं रह पाएंगे इसलिए गौतम अक्सर हमारे स्कूल आता जाता था और मैं उसे मिल जाती थी। जब भी वह मुझे मिलता तो मुझे उसे मिलकर बहुत अच्छा लगता था परंतु मेरे अंदर एक दुविधा थी कि यदि यह बात शर्मा जी को पता लगेगी तो वह मुझ पर बहुत गुस्सा होंगे क्योंकि गौतम मुझसे छोटा है और कहीं वह मेरे बारे में कुछ गलत ना समझे इसीलिए मैं इस बात से बहुत डरी हुई थी। मैंने इस बारे में गौतम से भी बात की वह मुझे कहने लगा कि पिताजी बहुत ही खुले विचारों के हैं, वह कभी भी इस प्रकार की सोच नहीं रखते लेकिन मैंने गौतम से कहा कि चाहे वह कितने भी खुले विचारों के व्यक्ति हो परंतु हमारे स्कूल में कई लोग अभी भी पुराने खयालात के हैं, वह हमारे रिलेशन को बिल्कुल भी मानने वाले नहीं है और वह शर्मा जी को कुछ ना कुछ हम दोनों के बारे में गलत बात कह देंगे। गौतम मुझे कहने लगा कि मुझे इस बात का बिल्कुल भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई दूसरा व्यक्ति हमारे बारे में क्या सोचता है। गौतम बहुत ही खुले विचारों का था, वह बहुत ओपन माइंडेड किस्म का लड़का है इसलिए उसे किसी भी बात का फर्क नहीं पड़ता। जब हम लोग उस दिन यह बात कर रहे थे तो गौतम मुझे कहने लगा कि तुम मेरे साथ मेरे घर पर चलो। जब मैं उसके घर पर गई तो वह मुझे समझ रहा था मैं उसे देखे जा रही थी। मैंने उसे गले लगाते हुए कहा कि मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करती हूं। जब मैंने उसे गले लगाया तो हम दोनों ही एक दूसरे की बाहों में थे और मुझे गौतम की बाहों में बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

मैंने गौतम के होठों को चूसना शुरू कर दिया बहुत देर तक मैंने उसके होठों को चूसा उसका लंड खड़ा हो चुका था। मैंने उसकी पैंट से उसके लंड को बाहर निकालते हुए अपने मुंह के अंदर समा लिया मैं उसके लंड को अपने गले तक ले रही थी। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब उसका लंड मेरे गले के अंदर तक जा रहा था। उसने भी मेरे सारे कपड़े खोल दिए और मैं उसके सामने नंगी थी। जब उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लिया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। अब उसने मुझे अपने बिस्तर पर लेटा दिया था और मेरी योनि को चाट रहा था। काफी देर तक उसने मेरी योनि को चाटा उसके बाद उसने मेरे दोनों पैर खोल दिया और अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाल दिया। जैसे ही मेरे अंदर उसका लंड गया तो मैं चिल्लाने लगी और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब उसका लंड मेरी योनि के अंदर बाहर होता जाता मुझे एक अलग ही तरीके की फीलिंग आती मैं उसका पूरा साथ देती। मैं अपने मुंह से मादक आवाज निकाल रही थी और उसे अपनी और आकर्षित कर रही थी। वह मुझे बहुत तेजी से चोदे जा रहा था और मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था लेकिन कुछ झटकों के बाद उसका माल मेरी योनि के अंदर गिर गया। उसके कुछ समय बाद में प्रेग्नेंट भी हो गई गौतम और मैं बहुत ज्यादा परेशान है हमें क्या करना चाहिए। उसने इस बारे में अपने पिता जी से भी बात की तो हमारे रिश्ते के लिए मान चुके है।

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