शादीशुदा माल की शानदार चूत


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मेरा नाम मोहन है और मैं कार के शोरूम में मैनेजर हूं, मुझे यहां पर काम करते हुए काफी समय हो चुका है, मेरी उम्र 35 वर्ष की है। मेरी शादी को भी 7 वर्ष हो चुके हैं और मैं अहमदाबाद में रहता हूं, मैं बचपन से ही अहमदाबाद में रह रहा हूं। मेरे पिताजी गांव से अहमदाबाद आ गए थे, उसके बाद उन्होंने यहीं पर नौकरी की और अहमदाबाद में ही घर ले लिया। जब उन्होंने यहां पर घर लिया तो उसके बाद से ही मैं यहां पर पढ़ाई कर रहा हूं। मेरे दो बड़े भाई हैं वह भी यहीं पर रह रहे हैं परंतु अब मेरे दोनों भाइयों ने अलग से अपना घर ले लिया है और मेरे पापा मम्मी मेरे साथ ही रहते हैं। वह लोग कभी मेरे भाइयों के पास चले जाते हैं। भैया लोग भी कभी हमारे घर पर उनके बारे में पूछने आ जाते हैं। मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब मैं अपने माता पिता के साथ समय बिताता हूं। वह बचपन से ही मुझे सबसे ज्यादा पसंद करते थे इसीलिए मैं अपने माता पिता के साथ रहना ही पसंद करता हूं और वह भी मेरे साथ अच्छे से रहते हैं।

मेरी पत्नी उनकी बहुत देखभाल करती है और मेरी पत्नी का व्यवहार भी उनके प्रति बहुत अच्छा रहता है इसलिए मुझे ज्यादा समस्या नहीं होती और मैं सिर्फ अपने काम पर ही ध्यान देता हूं। एक बार हमारे घर पर मेरे भैया के बच्चे आए हुए थे, वह लोग बहुत ही शरारती हैं और मेरे पापा मम्मी को वह लोग बहुत अच्छा मानते हैं इसलिए वह लोग अपनी छुट्टियों में अक्सर हमारे घर पर ही आते हैं। वो जब हमारे घर पर आए तो वह कुछ ज्यादा ही शरारत कर रहे थे जिस वजह से मेरे पिताजी गिर गए और उन्हें को चोट लग गई। तब मुझे उन्हें हॉस्पिटल में ले जाना पड़ा और मैंने अपने भैया के बच्चों को बहुत ज्यादा डांटा, जिससे कि वह लोग मुझसे बहुत ही गुस्सा हो गए और उसके बाद से वह लोग हमारे घर पर नहीं आते। मैंने जब यह बात अपने भैया को बताई तो वह कहने लगे कि तुमने बहुत अच्छा किया जो तुमने इन्हें डांट दिया। मैंने अपने भैया से कहा कि लेकिन वह लोग मुझसे बहुत गुस्सा हो गए, वह मुझसे बात भी नही कर रहे हैं और ना ही हमारे घर पर आ रहे हैं।

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मैंने अपने भैया से भी कहा कि उन्हें हमारे घर पर भेज दो लेकिन वह कहने लगे कि हम लोग वहां नहीं जाने वाले। अब मेरे पिता जी की भी तबीयत थोड़ा ठीक होने लगी थी। उन्हें कंधे पर चोट लगी थी। जब उनकी तबीयत ठीक हो गई तो वह मेरे भैया के घर पर चले गए जब वह वहां गए तो मैंने उनसे कहा कि आप अपना ध्यान दीजिए। अब वहां पर काफी दिन तक रहे और हमारे घर पर मेरी पत्नी और मेरे बच्चे ही थे। मेरा काम भी बहुत अच्छे से चल रहा है, मैं जिस शोरूम में काम करता हूं वहां पर जितने भी लोग हैं वह सब अच्छे हैं इसलिए मेरा बिजनेस का टारगेट पूरा हो जाता है। हमारे यहां से बहुत सारी कारें बिकती हैं और उनमें से कई कारें हमारे यहां पर सर्विस होने के लिए भी आती हैं। एक दिन मेरे सबसे बड़े वाले भैया कहने लगे कि मुझे तुम कोई बढ़िया सी गाड़ी दिलवादो,  मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं आपकी गाड़ी फाइनेंस करवा देता हूं। वह जब मेरे शोरूम में आए तो मैंने उन्हें गाड़ियां दिखाई, उसके बाद उन्होंने उसकी टेस्ट ड्राइव ली। अब उन्होंने भी हमारे यहां से कार ले ली। मैंने ही उनको फाइनेंस करवाया और वह बहुत खुश थे कि उन्होंने कार ले ली क्योंकि उनका काम भी बहुत अच्छे से चल रहा है इसी वजह से उन्होंने एक गाड़ी भी ले ली। वह कहने लगे कि मुझे अपने लिए कार की आवश्यकता होती है क्योंकि तुम्हारी भाभी कभी बच्चों को स्कूल लेने जाती है तो इस वजह से दिक्कत होती है। जब मेरे भैया ने वह कार ले ली तो उसके बाद उनके एक परिचित हमारे शोरूम में आए और वह मुझे मिले, वह दोनों पति-पत्नी थे और उनका नाम रमेश और रेखा था। जब उन्होंने मुझे बताया कि मुझे आपके भैया ने भेजा है तो मैंने उन्हें कहा कि हां बताइए आपको क्या जरूरत है, वह कहने लगे कि हमें कार लेनी है यदि आप हमें बताएं कि कौन सी कार हमारे लिए ठीक रहेगी तो हम वह कार ले लेते हैं। मैंने उनसे पूछा कि आप लोगों को कार फाइनेंस करवानी है, रमेश मुझे कहने लगे कि हां मुझे फाइनेंस करवानी है और थोड़ा बहुत पैसा में डाउन पेमेंट दे सकता हूं।

मैंने उन्हें अपने शोरूम में रखी गाड़ियां दिखाई। मैंने कहा कि यह आपके लिए ठीक रहेगी क्योंकि इसमें स्पेस बहुत है इसी वजह से उन्होंने वह गाड़ी फाइनेंस करवा ली। अब मैंने उनसे उनके सारे डॉक्यूमेंट ले लिए थे और उन्होने कुछ पैसे जमा भी कर दिए लेकिन उन्हें जो कलर चाहिए था वह हमारे पास अवेलेबल नहीं था इसलिए मैंने उन्हें कहा कि आपको थोड़ा समय इंतजार करना होगा जैसे ही वह कलर आ जाता है तो मैं आपको दिलवा दूंगा। वह काफी देर मेरे साथ ही बैठे हुए थे। मैंने जब उनसे पूछा कि आप क्या करते हैं तो वो कहने लगे कि मैं तो एक कंपनी में जॉब करता हूं और मेरी पत्नी स्कूल में टीचर है। जब उन्होंने अपनी पत्नी का इंट्रोडक्शन दिया तो उन्होंने अपना नाम मुझे बताया, उनका नाम रेखा है। वह लोग मेरे भैया के घर के पास ही रहते हैं। मैंने उनसे कहा कि आप लोगों को मैं कुछ दिनों बाद ही फोन कर दूंगा और जैसे ही मेरे पास वो कलर अवेलेबल होगा मैं तुरंत आपको बता दूंगा,  यह कहते हुए वह लोग चले गए। कुछ दिनों बाद वह कलर अवेलेबल हो गया तो मैंने रमेश जी को फोन किया और वह कहने लगे कि मैं तो अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में कहीं बाहर गया हुआ हूं, मुझे आने में कुछ महीने लग जाएंगे तो मैं एक काम करता हूं आपको अपनी पत्नी का नंबर दे देता हूं, आप उनसे ही बात कर लीजिए और वह आपके पास आकर सारा प्रोसीजर पूरा कर लेगी।

मैंने उन्हें कहा ठीक है आप मुझे नंबर भेज दीजिए मैं उन्हें फोन करके बता देता हूं। रमेश जी ने मुझे अपनी पत्नी रेखा का नंबर दे दिया और जब मैंने उन्हें फोन किया तो उन्होंने मुझे पहचान लिया और कहने लगी कि बताइए, मैंने उन्हें कहा कि आपकी कार आ चुकी है यदि आपके पास समय है तो आप आकर देख लीजिये। वह जब शोरूम में कर देखने आए तो उन्हें वह कलर बहुत ही पसंद आया और वह उस गाड़ी को घर ले गई। उन्होंने अपने सारे डॉक्यूमेंट मुझे दे दिए थे और जो भी फॉर्मेलिटीज थी वह सब पूरी कर दी थी लेकिन उस कार में कुछ समस्या हो रही थी इसलिए मुझे रेखा जी ने एक दिन फोन किया और कहने लगी कि कार में कुछ प्रॉब्लम आ रही है आप यदि किसी लड़के को भिजवा देते तो अच्छा रहता। मैंने उन्हें कहा कि आप एक काम कीजिए मैं कुछ दिनों बाद आपके घर पर आ जाऊंगा और उसके बाद वह कार अपने शोरूम में ले आऊंगा क्योंकि मेरे पास भी अभी वक्त नहीं था और रेखा जी के पास भी वक्त नहीं था, उनके पति रमेश अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में बाहर ही गए हुए थे इसीलिए उनके पास शोरूम में आने का बिल्कुल भी वक्त नहीं था। मैं भी काफी दिनों तक व्यस्त रह गया उसी बीच उनका दोबारा से मुझे फोन आया और मैंने उन्हें कहा कि मैं आपके घर में कल आ जाता हूं। मैं जब उनके घर अगले दिन गया तो मैंने उनकी घर की डोरबेल बजाई जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला तो वो कहने लगी कि आप अंदर बैठ जाइए। जब मैं उनके घर पर बैठा था तो मैंने उनसे उनकी कार की चाबी ले ली। वह मेरे पास में ही बैठी हुई थी जब मैं खड़ा उठा तो गलती से मेरा हाथ उनके स्तनों पर लग गया और जब मेरा हाथ उनके स्तनों पर लगा तो वह भी मचलने लगी। मैंने उन्हें कस कर अपनी बाहों में ले लिया मैंने जब उन्हें अपनी बाहों में लिया तो उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं कहा। मैं उन्हे उठाते हुए उनके बेडरूम के अंदर ले गया जब मैं उन्हें बेडरूम में ले गया तो मेरे अंदर की उत्तेजना पूरी बढ चुकी थी। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए हिलाना शुरू कर दिया और काफी देर तक हिलाने के बाद रेखा ने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और बहुत ही अच्छे से मेरे लंड का रसपान करने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूस रही थी।

मैंने काफी देर तक अपने लंड को रेखा के मुंह में ही रखा उसके बाद मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया उनके स्तन बड़े ही मुलायम और बड़े-बड़े थे मैं उन्हें अपने मुंह में ले रहा था और बहुत अच्छे से मैं उनका रसपान कर रहा था। उन्हें भी बहुत ही मजा आ रहा था जब मै उनके स्तनों का रसपान कर रहा था अब उनकी योनि पूरी गिली हो चुकी थी। मैंने उनकी योनि के अंदर अपनी उंगली जैसे ही डाल तो वह मचलने लगी और मैं अपनी उंगली को उनकी योनि के अंदर बाहर करता जाता उनकी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर की तरफ आने लगा था। मैंने अपने लंड को उनकी योनि के अंदर डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उनके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और अपने लंड से झटके देने शुरू कर दिए मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था और वह बहुत ही मजे में आ रही थी। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उन्हें धक्के मार रहा था उन्हें भी पूरा मजा आ रहा था वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने भी उन्हें इतनी तेजी से झटके मारे कि उनका शरीर पूरा गर्म होने लगा था उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया। उनकी चूत ज्यादा ही टाइट हो चुकी थी और जब मैं धक्का मार रहा था तो मुझे आनंद आने लगा मेरा वीर्य मेरे लंड के ऊपर तक आ गया था और जैसे ही मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर गया तो वह खुश हो गई। उसके बाद में उनकी गाड़ी को अपने सर्विस सेंटर ले गया और जब मैं वापस लाया तो मैंने उन्हें अच्छे से चोदा और उसके बाद तो अक्सर यह सिलसिला जारी ही रहा।

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