सूरज ने मुझे बड़े अच्छे से चोदा


antarvasna

मेरा नाम आकांक्षा है मैं बेंगलुरु की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 27 वर्ष है और मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करती हूं। मुझे उस कंपनी में काम करते हुए काफी समय हो चुका है लेकिन मैं अपने ऑफिस में ज्यादा किसी से भी संपर्क में नहीं रहती। मैं अपने ऑफिस में जाती हूं अपना काम खत्म होने के बाद समय पर घर चली जाती हूं। मेरा ऑफिस में किसी भी व्यक्ति से ज्यादा मतलब नहीं होता,  मैं सिर्फ काम की बात ही करती हूं और उसके बाद अपने घर चली जाती हूं। मैं बहुत ही कम लोगों के साथ बात करती हूं क्योंकि मुझे ज्यादा बात करना अच्छा नहीं लगता और ना ही मैं उनके साथ कंफर्टेबल महसूस कर पाती हूं। यह सब मेरी मां के साथ हुए अत्याचारों से हुआ है। मेरे पिताजी ने मेरी मां को काफी समय पहले ही छोड़ दिया था। मैं और मेरी मां ही साथ में रहते हैं। जब मेरे पिताजी और मेरी मां अलग हुए उस वक्त मेरी उम्र 18 वर्ष थी।

मैंने उस वक्त अपना स्कूल पूरा करके कॉलेज में दाखिला लिया था परंतु मेरे पिताजी का व्यवहार मेरी मां के लिए हमेशा से ही खराब था और वह उन्हें हमेशा ही गाली देते थे। कभी-कबार गुस्से में वह हम पर हाथ भी उठा दिया करते थे। मुझे यह बात बहुत ही बुरी लगती थी इसलिए मैं हमेशा ही उनका विरोध करती थी और मैं हमेशा ही अपनी मां की तरफ रहती थी, क्योंकि मेरी मां बहुत ही सीधी और सिंपल महिला है। वह ना तो ज्यादा किसी से बात करती है और ना ही किसी के साथ वह ऊंची आवाज में बोलती हैं, इसी वजह से मैं हमेशा ही उनकी तारीफ करती हूं परंतु मेरे पिताजी ने जो मेरी मां के साथ अन्याय किया वह मेरे दिल और दिमाग में बैठ चुका है। जब उन दोनों के बीच झगड़े होते थे तो मैं वह सब देखती थी लेकिन मैं उनके बीच में कुछ भी नहीं बोल सकती थी क्योंकि उस वक्त मेरी उम्र इतनी नहीं थी कि मैं उन्हें ज्यादा कुछ बोल संकू। मेरी मां मेरे सामने बहुत रोती थी और मुझे उस चीज का बहुत दुख होता था लेकिन उसके बावजूद भी मेरी मां ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने मुझे खुद ही अपने बल बूते पर पढाया है और वह अब एक कंपनी में नौकरी करती हैं, मेरी पढ़ाई के लिए उन्होंने काम भी किया।

मेरे पिताजी ने हमें घर का खर्चा देना बंद कर दिया था, उस वक्त हम लोग बहुत ही बुरी स्थिति में थे और गरीबी से हम लोग जूझ रहे थे, वह मेरे दिमाग में बैठ चुका है और इसलिए मैं किसी से भी ज्यादा बात नहीं करती। मुझे ऐसा लगता है कि यदि मैं किसी के साथ ज्यादा बात करूंगी तो शायद कहीं मेरे साथ भी ऐसा ही बुरा ना हो जाए इसलिए मैं ज्यादा किसी के साथ संपर्क में नहीं रहती। जब से मेरे माता पिता अलग हुए हैं उसके बाद से हमारे रिश्तेदारों ने भी हमारे घर पर आना छोड़ दिया है। हम दोनों ही आपस में बात करते हैं और कोई भी हमसे मिलने हमारे घर पर नहीं आता। मेरे नाना नानी का भी देहांत हो चुका है और कभी कबार मेरे मामा हम से मिलने आ जाते हैं और हमारा हाल-चाल पूछ लिया करते हैं। हम लोग एक किराए के घर पर रहते हैं लेकिन मैं सोच रही हूं कि अब जल्दी से अपना घर ले लूं ताकि हम लोग अपने तरीके से वहां पर रह पाए। इसी वजह से मैं अपना घर लेना चाहती हूं और उसके सिलसिले में मेरी एक बिल्डर से बात चल रही है। वह लोग नई लोकेशन पर घर बना रहे हैं, जिसका की प्राइस भी ठीक है और मैं भी उस बजट में घर ले सकती हूं, यदि मैं लोन के लिए अप्लाई करती हूं तो मेरा लोन भी जल्दी पास हो जाएगा, मेरी सैलरी भी अब अच्छी हो चुकी है इसीलिए मैं वहां घर लेना चाहती हूं। मैंने इस बारे में अपनी मां से भी बात की तो मेरी मां मुझे कहने लगी कि तुम्हें जिस प्रकार से अच्छा लगता है तुम उसी प्रकार से देख लो और तुम्हें यदि कुछ पैसों की आवश्यकता हो तो तुम मुझसे भी ले लेना क्योंकि हम दोनों ही नौकरी करते हैं और मेरी मां भी अच्छे पैसे कमाती है, हम दोनों ही काफी शेविंग्स करते हैं। मैंने अपनी मां से कहा कि तुम भी एक बार मेरे साथ उस लोकेशन पर चलकर घर देख लो तो तुम भी अपनी कुछ राय मुझे दे देना और उसके बाद मैं उन्हें बुकिंग अमाउंट दे दूंगी जिससे कि हम लोग घर पर रहने के लिए चले जाएंगे। मैं अपनी छुट्टी के दिन अपनी मां को भी अपने साथ फ्लैट दिखाने ले गई।

कुछ देर तो हम बिल्डर के ऑफिस में ही बैठे रहे क्योंकि जो लड़का उनके यहां काम करता है वह उस दिन आया नहीं था। बिल्डर कहने लगा कि आप कुछ देर इंतजार कर लीजिए, तब तक वह आ जाएगा इसीलिए हम लोग साथ में बैठे हुए थे। तब तक उन बिल्डर ने हमारे लिए कॉफी ऑर्डर कर दी और कुछ देर बाद कॉफी आ गई तो हम दोनों ही कॉफी पीने लगे, उसी बीच में वह लड़का भी आ गया और कहने लगा कि मैं आपको फ्लैट दिखा देता हूं। हम लोगों ने अपनी कॉफी खत्म की और उसके बाद हम लोग उस लड़के के साथ फ्लैट देखने के लिए चले गए। उसने हमें वह फ्लैट दिखाया तो मेरी मां को भी वह बहुत पसंद आया। मेरी मां कहने लगी ठीक है हम लोग यह फ्लैट ले लेते हैं और उसके बाद हम लोग बिल्डर के पास ही बैठ गए। हम लोगों ने उनसे बुकिंग अमाउंट पूछ लिया और हमने कहा कि हम आपको कुछ दिनों बाद चेक दे देते हैं और आप हमारा फ्लैट बुक कर लीजिए। वह कहने लगा ठीक है आप बैठिए मैं आपको बुकिंग अमाउंट निकाल कर दे देता हूं।

उसने बुकिंग अमाउंट हमें बता दिया और उसके बाद हम लोग वहां से चले गए। जब हम लोग वापस आ रहे थे तो उस वक्त रास्ते में मेरी मां की तबीयत खराब हो गई, उनका शरीर पूरा ठंडा हो चुका था। मैं बहुत घबरा गई, वहां पर बहुत भीड़ हो गई लेकिन किसी ने भी हमारी मदद नहीं की और मुझे भी बहुत घबराहट हो रही थी क्योंकि मैंने आज तक कभी भी इस प्रकार की स्थिति नहीं देखी थी। तभी वहां पर एक नौजवान युवक आया और उसने मेरी मां को उठाते हुए अपनी कार से हॉस्पिटल ले गया। मैं भी कार में ही बैठी हुई थी। वह लड़का मुझे कहने लगा आप घबराइए मत हम लोग इन्हें अस्पताल ले जाते हैं। उसके बाद यह ठीक हो जाएंगे, उसने मुझे बहुत ही हिम्मत दी, उसके बाद मैं अपनी मां को पकड कर बैठी हुई थी। जब हम लोग मेरी मां को अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक है उनका बीपी लो हो गया था। जिस वजह से वह गिर गई। डॉक्टर कहने लगे चिंता की कोई बात नहीं है, आप कुछ देर बाद उन्हें घर ले जा सकते हैं। मैं उस वक्त बहुत घबराई हुई थी इसलिए उस लड़के से मैं ज्यादा बात नहीं कर पाई परंतु उसके बाद मैंने उसका नाम पूछा उसका नाम सूरज है। मैंने सूरज से कहा कि तुमने मेरी बहुत मदद की, नहीं तो उस वक्त मैं बहुत घबरा गई थी और कोई भी हमारी मदद के लिए आगे नहीं आया। सूरज कहने लगा कोई बात नहीं यह तो मेरा फर्ज था यदि मैं आपकी मदद नही करता तो शायद कोई और व्यक्ति आपकी मदद के लिए आगे जरूर आता। मैं सूरज़ से पूछने लगी की तुम क्या करते हो, वह कहने लगा कि मैं एक कंपनी में जॉब करता हूं और आज मेरी छुट्टी थी इसीलिए मैं कहीं घूमने जा रहा था। मैंने उससे कहा कि मेरी वजह से आज आपकी छुट्टी भी खराब हो गई, वह कहने लगा ऐसी कोई बात नहीं है और अब मेरी मां भी ठीक हो चुकी थी। सूरज मुझे कहने लगा कि मैं आपको घर तक ड्राप कर देता हूं।  उसने हमें घर तक छोड़ा। फिर मैंने अपनी मां को कमरे में ले जाकर बिस्तर पर लेटा दिया और वह आराम करने लगी। मैं सूरज के साथ बैठी हुई थी और उससे बात कर रही थी। मैंने उसे बताया कि मैं आज तक किसी के साथ कंफर्टेबल हो कर बात नहीं कर पाई,  मैं जितनी तुमसे मैं बात कर रही हूं, उतनी बात मैंने आज तक किसी से नहीं करी। मैंने उसे अपने मां और पापा के बारे में बताया कि वह दोनों जब से अलग हुए हैं उसके बाद से मैं ज्यादा किसी से बात नहीं करती। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मुझे पता ही नहीं चला कब मेरा हाथ सूरज के हाथ पर लग गया।

जब मेरा हाथ उसके हाथ पर लगा तो उसने भी मेरी जांघ को कसकर दबा दिया और वह मेरे होठों को किस करने लगा। मुझे पता नहीं अंदर से करंट सा आने लगा मैंने भी उसे बहुत अच्छे से किस कर लिया। अब हम दोनों बिस्तर पर गए उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और उसने मेरे पूरे कपड़े खोल दिए। मैं जिंदगी में पहली बार किसी के सामने नंगी हुई थी। उसने मेरे पूरे शरीर को इतने अच्छे से चाटा कि मेरी योनि से बहुत तेज पानी निकलने लगा। सूरज ने जब अपने लंड को मेरे मुंह में डाला तो मैंने जिंदगी में पहली बार किसी का लंड अपने मुंह में लिया था मुझे पहले उससे बदबू आ रही थी लेकिन अब मुझे मजा आने लगा था। मैंने काफी देर तक उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा थोड़ी देर बाद उसने मेरी योनि को अच्छे से चाटा। उसने जैसे ही मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन जब वह अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा था। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरी योनि से कुछ बाहर की तरफ निकल रहा है। मैंने सूरज से पूछा कि मेरे चूत से कुछ बाहर निकल रहा है वह कहने लगा तुम्हारी चूत से खून निकल रहा है। वह बहुत खुश हो गया और उसने मेरी दोनों जांघों को पकड़ते हुए मुझे बड़ी तेजी से धक्के मारना शुरू कर दिया। उसने मुझे इतनी तेजी से धक्के मारे कि मेरा पूरा शरीर गर्म होने लगा। मुझसे उसके लंड की गर्मी बिल्कुल भी नहीं झेली जा रही थी। मैं सोचने लगी मैंने आज तक कभी भी किसी के साथ सेक्स क्यों नहीं किया मुझे बहुत मजा आ रहा था जब वह मुझे धक्के मार रहा था। वह मेरी टाइट चूत की  गर्मी को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और जैसे ही उसका माल मेरी योनि में गया तो मुझे बहुत गर्म महसूस हुआ और बहुत मजा भी आया। उसके बाद सूरज अपने घर चला गया और जब भी मेरा मन होता है तो मैं उसे फोन कर लेती और वह मेरी इच्छा पूरी कर दिया करता है।