ट्यूशन टीचर से अपनी चूत मरवाई


antarvasna kahani

मेरा नाम सुनीता है मैं एक ग्रहणी हूं, मेरी शादी को 15 वर्ष हो चुके हैं। मेरे पति एक बड़े कारोबारी हैं और वह अपने काम के सिलसिले में अक्सर बाहर जाते रहते हैं। मैं कोलकाता की रहने वाली हूं। हमारे साथ में हमारे देवर देवरानी भी रहते हैं। मेरे देवर भी मेरे पति के साथ ही काम करते हैं और वह दोनों साथ में ही अपने काम पर जाते हैं। मेरी देवरानी और मेरे बीच में बिल्कुल भी नहीं बनती है,  यह बात मेरे पति को भी पता है लेकिन उसके बावजूद भी हम लोग साथ में ही रह रहे हैं। मैंने उन्हें कई बार इस बारे में कहा कि हमें अलग रहना चाहिए परंतु वह मेरी बात बिलकुल भी नहीं मानते और वह मुझे कहते हैं कि तुम एडजेस्ट कर लो लेकिन मुझसे बिल्कुल भी एडजेस्ट नहीं हो रहा क्योंकि मेरी देवरानी का व्यवहार मेरे पर्ती बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।

जब भी हम दोनों घर पर होते हैं तो मैं उससे बिल्कुल भी बात करना पसंद नहीं करती और ना ही वह मुझसे बात करती है परंतु उसके बावजूद भी यदि कभी हमारी बात होती है तो उसमें हमारे झगड़े ही होते हैं और हमारी कॉलोनी में जितने भी लोग हैं उन्हें मेरी देवरानी, मेरे बारे में बहुत ही गलत बात कहती है इसीलिए मुझे बिल्कुल भी उसके साथ रहना अच्छा नहीं लगता। एक दिन हम दोनों के बीच में बहुत ज्यादा झगड़े हो गए। उस दिन मैंने अपने पति से कह दिया कि यदि हम अलग नहीं रहेंगे तो मैं अपने घर वापस चली जाऊंगी क्योंकि उस दिन हमारे बीच कुछ ज्यादा ही झगड़े हो चुके थे और मैं बिल्कुल भी नहीं चाहती कि मैं अब उसके साथ रहूं। मेरा देवर बहुत ही अच्छा है और वह मुझे कहने लगे कि आप इस तरीके की बात मत कीजिए क्योंकि मुझे बहुत बुरा लगेगा यदि आप घर से जाएंगे। वह मुझे हमेशा ही समझाते हैं परंतु मैं नहीं चाहती थी कि अब हम लोग साथ रहे, हमारे झगड़े का हमारे बच्चों के ऊपर गलत असर पड़ रहा था। मेरे पति ने मेरी बात मान ली और उन्होंने मेरे देवर से जब इस बारे में बात की तो वह कहने लगे कि यदि घर का माहौल खराब हो रहा है तो हम लोग ही कहीं और रहने चले जाते हैं।

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मेरे पति कहने लगे कि तुम लोग यहीं पर रहो,  मेरे पति ने एक प्रॉपर्टी कुछ समय पहले ही खरीदी थी। वह कहने लगे कि मैं उसका काम शुरू करवा देता हूं और कुछ समय बाद हम लोग वहां पर शिफ्ट हो जाएंगे। वह उसका काम करवाने लगे और उस वक्त मैं अपनी देवरानी से बिल्कुल भी बात नहीं करती थी। मैंने अपने पति से भी पूछा कि वह घर का काम कब तक पूरा हो जाएगा, वह कहने लगे कि कुछ समय बाद ही घर का काम पूरा हो जाएगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो। वह मुझे कह रहे थे कि तुम अब भी सोच लो अगर हम लोग साथ में रह सके तो वह हमारे लिए ठीक रहेगा। मैंने उन्हें साफ कह दिया कि मैं बिल्कुल भी अपनी देवरानी के साथ में नहीं रहना चाहती हूं क्योंकि वह पूरी कॉलोनी में मेरे बारे में गलत बात कहती है इसलिए मैं उसके साथ बिल्कुल भी अर्जेस्ट नहीं कर सकती। हमारे घर का काम पूरा होने में 5 महीने लग गये और 5 महीने बाद हम लोगों ने वहां पर शिफ्ट कर लिया। जब हमने वहां शिफ्ट किया तो शुरुआत में हमें एडजेस्ट करने में बहुत तकलीफ हुई क्योंकि हम लोग जिस कॉलोनी में रहते थे वहां पर हम लोग सब से परिचित थे इसलिए हमें किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई, यदि मुझे कभी भी कोई सामान मंगवाना होता तो मैं अपने पड़ोस के स्टोर में फोन कर दिया करती थी तो वह ही सारा सामान घर भिजवा दिया करते थे लेकिन जिस जगह हम लोग रह रहे थे वहां पर अभी इतनी सुविधा नहीं थी इसलिए हमें खुद ही सारा काम करना पड़ रहा था। मेरे देवर ने भी हमारी बहुत मदद की और उन्होंने हमारी शिफ्टिंग के समय बहुत मदद की। अब हम लोगों ने नई कॉलोनी में शिफ्ट कर लिया और हम लोग ज्यादा किसी से परिचित नहीं थे। मैंने अपने बच्चों का एडमिशन भी हमारे पास के ही स्कूल में करवा दिया था क्योंकि जिस जगह हम लोग रहते थे वहां मेरे बच्चों को बहुत दूर जाना पड़ रहा था इसलिए मैंने अपने  घर के पास के स्कूल में ही अपने बच्चों का एडमिशन करवा दिया।

मैं उन्हें स्कूल से घर ले आती थी और मेरी मुलाकात ज्यादा किसी से नहीं हो पाती थी क्योंकि वह लोग हमारे लिए बिल्कुल ही नए थे। मेरी मुलाकात एक दो महिलाओं से हुई, उनसे मैं बातचीत करने लगी और वह मुझसे पूछने लगे कि आप लोग यहां पर नए आए हैं, पहले आप लोग कहां रहते थे। मैंने उन्हें बताया कि हम लोग पहले ज्वाइंट फैमिली में थे लेकिन अब हम लोग अलग हो गए हैं इसलिए हम लोग यहां पर आ गए हैं। मेरी कुछ महिलाओं से मुलाकात होने लगी तो मैं उनके घर भी आती जाती थी और वह लोग भी हमारे घर पर आ जाते थे, मुझे अच्छा लगता था जब वह लोग हमारे घर पर आते थे क्योंकि मेरा समय अकेले नहीं कट पा रहा था। मैं घर पर बहुत बोर होती थी और मुझे कुछ भी समझ नहीं आता था कि मुझे कहां जाना चाहिए इसीलिए मैं घर पर रहती थी और दोपहर में अपने बच्चों को स्कूल से ले आती। मेरे पति भी सुबह अपने काम से निकल जाते थे और वह भी शाम के वक्त ही लौटते थे, कभी कबार तो वह काम के सिलसिले में बाहर भी जाते थे। मैं एक दिन सोचने लगी कि मुझे अपने बच्चों को ट्यूशन भेजना चाहिए क्योंकि मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूं इसी वजह से मैंने आसपास के लोगों से पूछा कि यहां पर कौन ट्यूशन पढ़ाता है तो वह कहने लगी कि यहां पर सुरजीत सर है वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं लेकिन मुझे उनका घर पता नहीं था। हमारे पड़ोस में ही एक महिला हैं, उन्होंने मुझे उनका घर बता दिया।

उनका घर हमारे घर के पीछे की तरफ ही था। वह हमारी कॉलोनी में ही रहते थे। उन्होंने मुझे उनका एड्रेस दे दिया और मैं उसके बाद उनके पास चली गई। जब मैं उनके पास गई तो वह मुझसे पूछने लगे कि आपके बच्चे कौन सी क्लास में पढ़ते हैं, मैंने उन्हें कहा कि मेरे बच्चे 6वीं और 7वीं क्लास में है। वह कहने लगे ठीक है आप कल से ही बच्चों को मेरे पास भेज दीजिए। मेरी उनसे जितनी भी बात हुई वह बात करने में बहुत ही अच्छे व्यक्ति लग रहे थे और वह किसी निजी स्कूल में भी पढ़ाते हैं। सुरजीत सर का व्यवहार तो मुझे बहुत अच्छा लगा इसी वजह से मैं अपने बच्चों को भी उनके पास पढ़ाने के लिए भेजने लगी। मैं ही अपने बच्चों को उनके घर तक छोड़ने जाती थी और फिर वापस आ जाती थी। मेरे बच्चों को उनके पास पढ़ते हुए काफी समय हो चुका था और वह बहुत ही अच्छे से पढ़ाई भी कर रहे थे। मैं जब उनसे घर में पूछा करती थी की आपकी पढ़ाई कैसी चल रही है, तो वह कहते की सुरजीत सर हमें बहुत ही अच्छा पढ़ाते हैं और हमें सब कुछ समझ आ जाता है। अब धीरे-धीरे हम लोग सब लोगों को जानने लगे थे और कॉलोनी में जब भी कोई प्रोग्राम होता तो वह लोग हमें भी इनवाइट करते थे। एक बार कॉलोनी में एक छोटा सा प्रोग्राम था, वह प्रोग्राम कॉलोनी वाले ही मिलकर करवा रहे थे। मैंने इस बारे में अपने पति से भी बात की तो वह कहने लगे की मुझे कहीं बाहर जाना है इसलिए मैं वह प्रोग्राम ज्वाइन नहीं कर पाऊंगा। उसके बाद मैं ही प्रोग्राम में चली गई। उस प्रोग्राम के दौरान सब लोग बहुत इंजॉय कर रहे थे, मुझे सुरजीत मिल गए, जब मैं उनसे बातें कर रही थी तो मुझे उनके बारे में ज्यादा पता नहीं था इसलिए उस दिन मैं उनसे काफी बातें कर रही थी। जब मुझे पता चला कि उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है तो मैंने उनसे उसका कारण पूछा,  वह कहने लगे कि मैंने अपने निजी कारणों से अभी तक शादी नहीं की है लेकिन वह बात करने में बहुत ही अच्छे हैं और मै उनके साथ काफी बातें कर रही थी, मैं अपने बच्चों के बारे में भी पूछ रही थी। जब हम लोग बात कर रहे थे तो मुझे उनसे बात करना अच्छा लगा था और अब  प्रोग्राम भी खत्म हो गया था। जब वह अपने घर जा रहे थे तो मैंने उन्हें कहा कि आप कुछ देर हमारे घर पर ही बैठ जाइए हमारा घर यहीं पास में है।

जब वह हमारे घर पर आए तो मैंने अपने बच्चों को सुला दिया और हम दोनों बैठ कर बात कर रहे थे। मुझे उनसे बात करना बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन मुझे ऐसा प्रतीत होने लगा कि उनका लंड खड़ा हो रहा है इसलिए मैंने उनके लंड पर हाथ मार दिया। जब मेरा हाथ उनके लंड पर लगा तो उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरे होठों को चूसने लगे। वह मेरे होठों को बहुत अच्छे से चूस रहे थे मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा। काफी देर तक उन्होंने ऐसे ही मेरे होठों का रसपान किया। जब उन्होंने मेरे पूरे कपड़े खोले तो उन्होंने काफी देर तक मेरे चूचो को चूसा और मेरी गांड को दबा रहे थे। मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा था इस वजह से मैं अपने बिस्तर पर लेट गई और उनके लंड को अपनी योनि के अंदर डाल दिया। जैसे ही उनका लंड मेरी योनि में घुसा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। वह बड़ी तेजी से मुझे चोदे जा रहे थे मुझे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया था और वह भी मुझे बड़ी तीव्रता से चोदते जाते। उन्होंने मेरे चूचो को अपने मुंह में ले लिया तो मुझे और भी अच्छा महसूस होने लगा। उन्होंने मेरी चूत मारनी जारी रखी थी जिससे कि मेरे अंदर की गर्मी बाहर निकलने लगी थी और मैं झड़ने वाली थी। मैंने अपने दोनों पैरों को से सुरजीत सर को जकड लिया उनका माल मेरी योनि के अंदर गिर गया। मैंने अपनी योनि से उनके माल को साफ किया और उनके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना जारी रखा जिससे कि उनके लंड पर लगे माल को मैंने अपने अंदर ले लिया था। अब उन्होंने अपने कपड़े पहने और मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए। उसके बाद से सुरजीत सर हमारे घर आते हैं और वह मुझे चोदकर जाते हैं जिससे कि मुझे बहुत अच्छा लगता है।

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